Friday, 9 September 2016

परीक्षा में सफलता  के  सरल उपाय 

pariksha me saphlta ke srl upay 



Image result for ganesh rudrakshaपरीक्षा में सफलता  के  अभिमंत्रित  गणेश रुद्राक्ष धारण करें। बुधवार को गणेश जी के मंदिर में जाकर दर्शन करें सिंदूर दूर्वा  और मूंग के लड्डुओं का भोग लगाकर सफलता की प्रार्थना करें।
ध्यान कि मुद्रा 15 मिनिट अवश्य बनावे |

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यदि अधिक बाधा आवे तो आपनी जन्मपत्रिका देखावे परमर्स ले |+917697961597

पुराण कि जानकारी

                        पुराण कि जानकारी 

1. ब्रह्म पुराण
2. पद्म पुराण
3. विष्णु पुराण
4. वायु पुराण -- (शिव पुराण)
5. भागवत पुराण -- (देवीभागवत पुराण )
6. नारद पुराण
7. मार्कण्डेय पुराण
8. अग्नि पुराण
9. भविष्य पुराण
10. ब्रह्म वैवर्त पुराण
11. लिङ्ग पुराण
12. वाराह पुराण
13. स्कन्द पुराण
14. वामन पुराण
15. कूर्म पुराण
16. मत्स्य पुराण
17. गरुड़ पुराण
18. ब्रह्माण्ड पुराण
( *उपपुराण* )
1. गणेश पुराण
2. श्री नरसिंह पुराण
3. कल्कि पुराण
4. एकाम्र पुराण
5. कपिल पुराण
6. दत्त पुराण
7. श्रीविष्णुधर्मौत्तर पुराण
8. मुद्गगल पुराण
9. सनत्कुमार पुराण
10. शिवधर्म पुराण
11. आचार्य पुराण
12. मानव पुराण
13. उश्ना पुराण
14. वरुण पुराण
15. कालिका पुराण
16. महेश्वर पुराण
17. साम्ब पुराण
18. सौर पुराण
19. पराशर पुराण
20. मरीच पुराण
21. भार्गव पुराण
( *अन्यपुराण तथा ग्रन्थ* )
1. हरिवंश पुराण
2. सौरपुराण
3. महाभारत
4. श्रीरामचरितमानस
5. रामायण
6. श्रीमद्भगवद्गीता
7. गर्ग संहिता
8. योगवासिष्ठ
9. प्रज्ञा पुराण
( *पुराणों कि श्लोक संख्या* )....
1. ब्रह्मपुराण में श्लोकों की संख्या १४००० और २४६ अद्धयाय है|
2. पद्मपुराण में श्लोकों की संख्या ५५००० हैं।
3. विष्णुपुराण में श्लोकों की संख्या तेइस हजार हैं।
4. शिवपुराण में श्लोकों की संख्या चौबीस हजार हैं।
5. श्रीमद्भावतपुराण में श्लोकों की संख्या अठारह हजार हैं।
6. नारदपुराण में श्लोकों की संख्या पच्चीस हजार हैं।
7. मार्कण्डेयपुराण में श्लोकों की संख्या नौ हजार हैं।
8. अग्निपुराण में श्लोकों की संख्या पन्द्रह हजार हैं।
9. भविष्यपुराण में श्लोकों की संख्या चौदह हजार पाँच सौ हैं।
10. ब्रह्मवैवर्तपुराण में श्लोकों की संख्या अठारह हजार हैं।
11. लिंगपुराण में श्लोकों की संख्या ग्यारह हजार हैं।
12. वाराहपुराण में श्लोकों की संख्या चौबीस हजार हैं।
13. स्कन्धपुराण में श्लोकों की संख्या इक्यासी हजार एक सौ हैं।
14. वामनपुराण में श्लोकों की संख्या दस हजार हैं।
15. कूर्मपुराण में श्लोकों की संख्या सत्रह हजार हैं।
16. मत्सयपुराण में श्लोकों की संख्या चौदह हजार हैं।
17. गरुड़पुराण में श्लोकों की संख्या उन्नीस हजार हैं।
18. ब्रह्माण्डपुराण में श्लोकों की संख्या बारह हजार हैं।

Tuesday, 6 September 2016

चाणक्य की मृत्यु कैसे हुई थी


 महान राजनीतिज्ञ आचार्य चाणक्य की मृत्यु कैसे हुई थी


यदि दुनिया में कोई महान राजनीतिज्ञ कभी हुआ था तो वे थे आचार्य चाणक्य, यही कहती है सारी दुनिया और यही मानते हैं सभी लोग। चाहे प्राचीन काल हो या आज का युग, आज भी लोग एक महान राजनीतिज्ञ बनने के लिए आचार्य चाणक्य द्वारा बताए गए उसूलों पर चलना चाहते हैं।
यह दुनिया उनसे एक सफल इंसान और बुद्धिमान व्यक्तित्व पाने की चाहत रखती है और कई लोग ऐसा करने में सफल भी हो जाते हैं। यदि आप नहीं जानते तो बता दें कि आचार्य चाणक्य मौर्यकाल के महान व्यक्ति थे।
यदि आज दुनिया मौर्य काल को याद करती है या फिर वह काल यदि ऐतिहासिक किताबों का हिस्सा बन पाया है तो वह केवल आचार्य चाणक्य की वजह से ही संभव हुआ है।
Image result for chANAKYAइतिहास की बात करें, तो कुछ जगहों पर कौटिल्य के नाम से विख्यात आचार्य चाणक्य ने ही नंदवंश का नाश करके चन्द्रगुप्त मौर्य को राजा बनाया। चन्द्रगुप्त मौर्य को सीख प्रदान की, एक महान राजा बनने के उपदेश दिए और मौर्य समाज के झंडे को स्वतंत्र हवा में लहरा सकने की सक्षमता प्रदान की।
आचार्य चाणक्य के जीवन से जुड़ी कई बातें हम जानते हैं। उनका जन्म, उनके द्वारा अपने जीवन में किए गए महान कार्य जैसे कि अर्थशास्त्र जैसे महान ग्रंथ का लेखन करना, जिसमें उन्होंने जीवन के विभिन्न पहलुओं को हिम्मत से पार कर सकने का ज्ञान प्रदान किया है। आचार्य चाणक्य से जुड़ी कई कहानियां हमने सुनी हैं लेकिन आज भी लोग इस बात से अनजान हैं कि आखिरकार आचार्य चाणक्य की मौत कैसे हुई?
यह कोई सामान्य मौत थी या बनी बनाई साजिश? क्योंकि जाहिर है कि जिस स्तर पर आचार्य चाणक्य मौजूद थे, वहीं उनके कई दुश्मन भी मौजूद थे। उनकी मृत्यु को लेकर इतिहास के पन्नों में एक नहीं अनेक कहानियां प्रचलित हैं, लेकिन कौन सी सच है यह कोई नहीं जानता। परंतु आज हम इसी राज से पर्दा उठाने की कोशिश करने जा रहे हैं।
आचार्य चाणक्य की मौत को लेकर इतिहास के पन्नों में से दो कहानियां खोजी गई हैं, लेकिन कौन सी सही है इस सार तक कोई नहीं पहुंच पाया है। महान शोधकर्ता भी आज तक यह जान नहीं पाए कि आखिर आचार्य चाणक्य के साथ क्या हुआ था? उनकी मृत्यु का कारण क्या वे स्वयं थे या कोई और?
जो दो कहानियां प्रचलित हैं उनमें से पहली कहानी के अनुसार शायद आचार्य चाणक्य ने तब तक अन्न और जल का त्याग किया था जब तक मृत्यु नहीं आई। परंतु दूसरे कहानी के अनुसार वे किसी दुश्मन के षड्यंत्र का शिकार हुए थे, जिसकी वजह से उनकी मौत हुई।
ऐतिहासिक तथ्यों के अनुसार एक आम से बालक चंद्रगुप्त मौर्य को आचार्य चाणक्य की सह ने सम्राट बनाया। मौर्य वंश का राजा बनाया, एक बड़ा साम्राज्य उसके हाथों में सौंपा और उसका नाम इतिहास के पन्नों में सुनहरे अक्षरों से लिखवा दिया।
आचार्य चाणक्य की सीख से चंद्रगुप्त मौर्य ने मौर्य वंश को एक नया रूप दिया, इस वंश को दुनिया के शक्तिशाली वंश के रूप में प्रकट किया और खुद को एक महान राजा की छवि प्रदान की। उनकी मृत्यु के बाद उनके पुत्र राजा बिंदुसार ने भी पिता चंद्रगुप्त मौर्य की तरह आचार्य के सिखाए कदमों पर चलना सीखा। चंद्रगुप्त मौर्य की तरह ही आचार्य ने बिंदुसार को भी एक सफल राजा होने का पाठ पढ़ाया।

सब कुछ सही चल रहा था, आचार्य के अनुशासन तले राजा बिंदुसार अपनी प्रजा को पूर्ण रूप से सुखी रखने में सफल थे लेकिन दूसरी ओर कोई था जिसे आचार्य की राजा के प्रति इतनी करीबी पसंद नहीं थी। वह था सुबंधु, राजा बिंदुसार का मंत्री जो कुछ भी करके आचार्य चाणक्य को राजा से दूर कर देना चाहता था।
इसके लिए उसने कई षड्यंत्र रचे, उसे राजा को आचार्य चाणक्य के विरुद्ध करने के विभिन्न प्रयास किए जिसमें से एक था राजा के मन में यह गलतफ़हमी उत्पन्न कराना कि उनकी माता की मृत्यु का कारण कोई और नहीं वरन् स्वयं आचार्य चाणक्य ही हैं। ऐसा करने में सुबंधु कुछ मायनों में सफल भी हुए, धीरे-धीरे राजा और आचार्य में दूरियां बनने लगीं।
यह दूरियां इतनी बढ़ गईं कि आचार्य सम्राट बिंदुसार को कुछ भी समझा सकने में असमर्थ थे। अंतत: उन्होंने महल छोड़कर जाने का फैसला कर लिया और एक दिन वे चुपचाप महल से निकल गए। उनके जाने के बाद जिस दाई ने राजा बिंदुसार की माता जी का ख्याल रखा था उन्होंने उनकी मृत्यु का राज सबको बताया।
उस दाई के अनुसार जब सम्राट चंद्रगुप्त को आचार्य एक अच्छे राजा होने की तालीम दे रहे थे तब वे सम्राट के खाने में रोज़ाना थोड़ा थोड़ा विष मिलाते थे ताकि वे विष को ग्रहण करने के आदी हो जाएं और यदि कभी शत्रु उन्हें विष का सेवन कराकर मारने की कोशिश भी कर तो उसका राजा पर कोई असर ना हो
लेकिन एक दिन विष मिलाया हुआ खाना राजा की पत्नी ने ग्रहण कर लिया जो उस समय गर्भवती थीं। विष से पूरित खाना खाते ही उनकी तबियत बिगड़ने लगी, जब आचार्य को इस बात का पता चला तो उन्होंने तुरंत रानी के गर्भ को काटकर उसमें से शिशु को बाहर निकाला और राजा के वंश की रक्षा की। यह शिशु आगे चलकर राजा बिंदुसार के रूप में विख्यात हुए।
आचार्य चाणक्य ने ऐसा करके मौर्य साम्राज्य के वंश को खत्म होने से बचाया था लेकिन बाद में किसी ने यह गलत अफवाह फैला दी कि रानी की मृत्यु आचार्य की वजह से हुई। अंतत: जब राजा बिंदुसार को दाई से यह सत्य पता चला तो उन्होंने आचार्य के सिर पर लगा दाग हटाने के लिए उन्हें महल में वापस लौटने को कहा लेकिन आचार्य ने इनकार कर दिया।
उन्होंने ताउम्र उपवास करने की ठान ली और अंत में प्राण त्याग दिए। परंतु एक दूसरी कहानी के अनुसार राजा के मंत्री सुबंधु ने आचार्य को जिंदा जलाने की कोशिश की थी, जिसमें वे सफल भी हुए।
ऐतिहासिक तथ्यों के अनुसार आचार्य चाणक्य ने खुद प्राण त्यागे थे या फिर वे किसी षड़यंत्र का शिकार हुए थे यह आज तक साफ नहीं हो पाया है। क्योंकि विभिन्न शोधकर्ता हर बार भिन्न-भिन्न परिणामों के साथ सामने आते हैं जो अंत में यह सवाल खड़ा कर देते हैं कि आखिर चाणक्य के साथ हुआ क्या था?
आचार्य चाणक्य के कारण भारतीय इतिहास एक तिजोरी के रूप में सामने आया है। जिसमें चाणक्य नीतियों से भरा खजाना है। 

रुद्राक्ष की पहचान के कुछ तरीके

                                                                                   रुद्राक्ष की पहचान के कुछ तरीके 

                                Rudraksh ki pachan ke tarike 



    Image result for rudraksha in hindi
  • रुद्राक्ष की पहचान के लिए रुद्राक्ष को कुछ घंटे के लिए पानी में उबालें यदि रुद्राक्ष का रंग न निकले या उस पर किसी प्रकार का कोई असर न हो, तो वह असली होगा.
  • रुद्राक्ष को काटने पर यदि उसके भीतर उतने ही घेर दिखाई दें जितने की बाहर हैं तो यह असली रुद्राक्ष होगा. यह परीक्षण सही माना जाता है,किंतु इसका नकारात्मक पहलू यह है कि रुद्राक्ष नष्ट हो जाता है.
  • रुद्राक्ष की पहचान के लिए उसे किसी नुकिली वस्तु द्वारा कुरेदें यदि उसमे से रेशा निकले तो समझें की रुद्राक्ष असली है.
  • एक अन्य उपाय है कि रुद्राक्ष को पानी में डालें अगर यह डूब जाए, तो असली होगा. यदि नहीं डूबता तो नकली लेकिन यह जांच उपयोगी नहीं ं मानी जाती है क्योंकि रुद्राक्ष के डूबने या तैरने की क्षमता उसके घनत्व एवं कच्चे या पके होने पर निर्भर करती है और रुद्राक्ष मेटल या किसी अन्य भारी चीज से भी बना रुद्राक्ष भी पानी में डूब जाता है.
  • एक अन्य उपयोग द्वारा रुद्राक्ष के मनके को तांबे के दो सिक्कों के बीच में रखा जाए, तो थोड़ा सा हिल जाता है
  • क्योंकि रुद्राक्ष में चुंबकत्व होता है जिस की वजह से ऐसा होता है
  • एकमुखी रुद्राक्ष को ध्यानपूर्वक देखने पर उस पर त्रिशूल या नेत्र के चिन्ह का आभास होता है. रुद्राक्ष के दानों को तेज धूप में काफी समय तक रखने से अगर रुद्राक्ष पर दरार न आए या वह टूटे नहीं तो असली माने जाते हैं.
  • रुद्राक्ष को खरीदने से पहले कुछ मूलभूत बातों का अवश्य ध्यान रखें  जैसे की  रुद्राक्ष में किडा़ न लगा हो, टूटा-फूटा न हो, पूर्ण गोल न हो,  जो रुद्राक्ष छिद्र करते हुए फट जाए इत्यादि रुद्राक्षों को धारण नहीं करना चाहिए .

Monday, 29 August 2016

शनि कि साढ़े साती 2017 किन -किन पर है साढ़े साती व ढैय्या

shani ki sadhe sati 2017


शनि कि साढ़े साती 2017 किन -किन पर है साढ़े साती व ढैय्या



Image result for शनि ग्रहशनि 26 जनवरी 2017 को सायं 19:20  बजे वृश्चिक राशि से धनु राशि में प्रवेश कर जायेगा , शनि की यह स्थिति “साढ़े साती” में परिवर्तन कर देगी . शनि के धनु में प्रवेश करते ही तुला राशि के जातकों को साढ़े साती से पूरी तरह से मुक्ति मिल जाएगी , इसके अलावा वृश्चिक राशि वालों के लिए शनि साढ़े साती का अंतिम दौर प्रारंभ हो जायेगा तथा धनु वालों के लिए इसका मध्य भाग प्रारम्भ हो जायेगा और मकर राशि के जातकों के लिए “शनि साढ़े साती” प्रारम्भ हो जाएगी |
वृषभ  एव कन्या राशि पर शनि कि ढैय्या प्रारम्भ हो जाएगी |