Wednesday, 31 October 2018
Tuesday, 30 October 2018
धनतेरस 2018 --का शुभ पूजा खरीदार मुहूर्त
धनतेरस 2018 --का शुभ पूजा खरीदार मुहूर्त
Dhanteras 2018 Shubha Muhurat:
दिवाली का पर्व 7 नवंबर को मनाया जाएगा लेकिन ठीक उससे दो दिन पूर्व यानि 5 नवंबर धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है। मान्यता है कि धनतेरस के दिन भगवान धनवंतरी का जन्म हुआ था इसलिए इस दिन खासतौर पर उनकी पूजा की जाती है। इस दिन मां लक्ष्मी और गणेश जी की भी पूजा होती है। ज्योतिष के अनुसार धनतेरस के दिन शुभ मुहूर्त में की गई खरीदारी जीवन में ढेर सारी सफलता और समृद्धि लेकर आती है। इस दिन लोग बर्तन और गहनों की खरीदारी करते हैं। यदि इस खास पर्व पर शुभ मुहूर्त में पूजा की जाए तो घर में धन की वर्षा हो सकती है। इस साल धनतेरस के दिन पूजा करने के लिए 1 घंटा 55 मिनट तक का वक्त रहेगाधनतेरस में पूजा करने का शुभ मुहूर्त:
धनतेरस 2018 का शुभ मुहूर्त-
- धनतेरस पर पूजा करने का शुभ मुहूर्त: शाम 6.05 बजे से 8.01 बजे तक का है
- शुभ मुहूर्त की अवधि: 1 घंटा 55 मिनट
- प्रदोष काल: शाम 5.29 से रात 8.07 बजे तक
- वृषभ काल: शाम 6:05 बजे से रात 8:01 बजे तक
- त्रयोदशी तिथि आरंभ: 5 नवंबर को सुबह 01:24 बजे
- त्रयोदशी तिथि खत्म: 5 नवंबर को रात्रि 11.46 बजे
धनतेरस के दिन इस मुहूर्त में करें खरीदार
- दोपहर 01:00 से 02:30 बजे तक
- रात 05:35 से 07:30 बजे तक
नरक चतुर्दशी 2018: कथा, पढ़ने या सुनने मात्र से घोर नरकों की यातनाओं से मिलती है मुक्ति
नरक चतुर्दशी 2018: कथा, पढ़ने या सुनने मात्र से घोर नरकों की यातनाओं से मिलती है मुक्ति
narak-chaturdashi-2018-narak-chaturdashi-katha-
दिवाली से एक दिन पहले यानी छोटी दिवाली के दिननरक चतुर्दशी मनाई जाती है।कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि यानी अमावस्या से एक दिन पहले आती है। इस साल 6 नवम्बर को नरक चतुर्दशी मनाई जाएगी।
नरक चतुर्दशी की कथा-
नरक चतुर्दशी कथा
एक समय की बात है रंति देव नामक एक पुण्यात्मा और धर्मात्मा राजा थे। उन्होंने जाने-अनजाने में भी कभी कोई पाप नहीं किया। हमेशा वो संसार के भले के लिए कार्य करने में तत्पर रहा करते थे। लेकिन सदैव सात्विक जीवन जीने के बावजूद भी जब मृत्यु का समय आया तो उनके समक्ष यमदूत आ खड़े हो गए। यमदूत को सामने देख राजा अचंभित हो गए। राजा बोले हे ईश्वर मैंने तो कभी कोई पाप कर्म नहीं किया। कभी गलती से भी किसी का दिल नहीं दुखाया फिर आप मुझे लेने क्यों आए हो क्योंकि आपके यहां आने का मतलब है कि मुझे नरक जाना होगा। आप मुझ पर कृपा करें और बताएं कि मेरे किस अपराध के कारण मुझे नरक जाना पड़ रहा है।
यह सुनकर यमदूत ने कहा कि- हे राजन् एक बार आपके द्वार से एक ब्राह्मण भूखा लौट गया था, यह उसी पाप कर्म का फल है। वजह के बारे में पता चलने के बाद राजा ने यमदूत से प्रार्थना की कि प्रभु कृपा कर मुझे एक वर्ष का समय दे दीजिए मैं अपने पाप कर्मों का धरती पर ही प्रायश्चित करना चाहता हूं।
तब यमदूतों ने राजा को एक वर्ष का समय दे दिया। राजा अपनी नरक लोक को जाने की समस्या लेकर ऋषियों के पास पहुंचे और उन्हें अपनी सारी कहानी सुनाकर उनसे इस पाप से मुक्ति का उपाय पूछा।
तब ऋषि ने उन्हें बताया कि कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी आने पर आप उसका व्रत करें। उस दिन ब्राह्मणों को भोजन करवा कर। उनकी सेवा करें। और उनके प्रति हुए अपने अपराधों के लिए क्षमा याचना करें। राजा ने वैसा ही किया जैसा ऋषियों ने उन्हें बताया था।
इस प्रकार राजा पाप मुक्त हुए और यमदूतों और नरक से दूर हो। विष्णु लोक अथार्त बैकुण्ठ लोक में स्थान प्राप्त हुआ। उस दिन से पाप और नर्क से मुक्ति हेतु भूलोक यानी पृथ्वी पर कार्तिक चतुर्दशी के दिन का व्रत प्रचलित हो गया।
नरक चतुर्दशी कथा सभी पापों को हर कर घोर नरकों से दूर करने वाली है। इसको पढ़ने-सुनने से मनुष्य नरक लोक से मुक्ति पा जाता है। नरक चतुर्दशी कथा का महत्व इतना अधिक है कि इसके निमित्त दीप प्रज्जवलित कर लेने से भी व्यक्ति के सारे पाप नष्ट हो जाते है।
Sunday, 28 October 2018
Subscribe to:
Posts (Atom)