Showing posts with label 25 aprilko hoga sal ka pahaka aor aakhri chandrgrhan. Show all posts
Showing posts with label 25 aprilko hoga sal ka pahaka aor aakhri chandrgrhan. Show all posts

Wednesday, 16 October 2019

कार्तिक मास का विशेष महत्व

 कार्तिक मास का विशेष महत्व

Image result for कार्तिक मासकार्तिक महीने का हिन्दू धर्म में खास महत्व है। यह मास शरद पूर्णिमा से शुरू होकर कार्तिक पूर्णिमा पर खत्म होता है। इस महीने में दान, पूजा-पाठ तथा स्नान का बहुत महत्व होता है तथा इसे कार्तिक स्नान की संज्ञा दी जाती है। यह स्नान सूर्योदय से पूर्व किया जाता है। स्नान कर पूजा-पाठ को खास अहमियत दी जाती है। साथ ही देश की पवित्र नदियों में स्नान का खास महत्व होता है। इस दौरान घर की महिलाएं नदियों में ब्रह्ममूहुर्त में स्नान करती हैं। यह स्नान विवाहित तथा कुंवारी दोनों के लिए फलदायी होता है। इस महीने में दान करना भी लाभकारी होता है। दीपदान का भी खास विधान है। यह दीपदान मंदिरों, नदियों के अलावा आकाश में भी किया जाता है। यही नहीं ब्राह्मण भोज, गाय दान, तुलसी दान, आंवला दान तथा अन्न दान का भी महत्व होता है।
 
हिन्दू धर्म में इस महीने में कुछ परहेज बताए गए हैं। कार्तिक स्नान करने वाले श्रद्धालुओं को इसका पालन करना चाहिए। इस मास में धूम्रपान निषेध होता है। यही नहीं लहुसन, प्याज और मांसाहर का सेवन भी वर्जित होता है। इस महीने में भक्त को बिस्तर पर नहीं सोना चाहिए उसे भूमि शयन करना चाहिए। इस दौरान सूर्य उपासना विशेष फलदायी होती है। साथ ही दाल खाना तथा दोपहर में सोना भी अच्छा नहीं माना जाता है।
 
कार्तिक महीने में तुलसी की पूजा का खास महत्व है। ऐसा माना जाता है कि तुलसी जी भगवान विष्णु की प्रिया हैं। तुलसी की पूजा कर भक्त भगवान विष्णु को भी प्रसन्न कर सकते हैं। इसलिए श्रद्धालु गण विशेष रूप से तुलसी की आराधना करते हैं। इस महीने में स्नान के बाद तुलसी तथा सूर्य को जल अर्पित किया जाता है तथा पूजा-अर्चना की जाती है। यही नहीं तुलसी के पत्तों को खाया भी जाता है जिससे शरीर निरोगी रहता है। साथ ही तुलसी के पत्तों को चरणामृत बनाते समय भी डाला जाता है। यही नहीं तुलसी के पौधे का कार्तिक महीने में दान भी दिया जाता है। तुलसी के पौधे के पास सुबह-शाम दीया भी जलाया जाता है। अगर यह पौधा घर के बाहर होता है तो किसी भी प्रकार का रोग तथा व्याधि घर में प्रवेश नहीं कर पाते हैं। तुलसी अर्चना से न केवल घर के रोग, दुख दूर होते हैं बल्कि अर्थ, धर्म, काम तथा मोक्ष की भी प्राप्ति होती है।

Tuesday, 2 April 2013

25 aprilko hoga sal ka pahaka aor aakhri chandrgrhan



25 अप्रैल को होगा साल का पहला और आखिरी चंद्रग्रहण


25 aprilko hoga  sal  ka pahaka  aor  aakhri chandrgrhan








इस महीने की 25 तारीख को भारत में खण्डग्रास चंद्र ग्रहण होने वाला है। ये ग्रहण साल का पहला और आखिरी ग्रहण है जो भारत में दिखेगा भी और जिसका असर भी होगा। यह ग्रहण अपने आप में बहुत खास होगा जानिए क्यों?
क्योंकि भारत में दिखने वाला ये एक मात्र ग्रहण होगा जो साल का पहला और आखिरी ग्रहण होगा। ये ग्रहण बहुत खास इसलिए भी रहेगा क्योंकि हनुमान जयंती पर यह ग्रहण होगा। ग्रहण के समय सितारे बहुत खास रहेंगे। ग्रहण के समय बनने वाली ग्रह स्थिति विशेष प्रभाव देने वाली रहेगी।ग्रहण का असर कब से कब तक-

इस ग्रहण का पर्व काल बहुत कम है लेकिन यह ग्रहण दृश्य होने से महत्वपूर्ण होगा। इस खण्डग्रास चंद्र ग्रहण का सूतक 9 घण्टे पहले से ही शुरु हो जाएगा। यानी 25 अप्रैल को शाम 4 बजकर 20 मिनट से ग्रहण का सूतक शुरु हो जाएगा और 26 तारीख को 1 बजकर 54 मिनट पर ग्रहण के साथ सूतक भी खत्म हो जाएगा।
 ग्रहण में क्या करें क्या न करें-

चंद्रग्रहण शुरू होने से 9 घंटे पहले और सूर्यग्रहण शुरू होने के 12 घंटे पहले सूतक काल शुरू हो जाता है। सूतक काल में खाना खाना, सोना और सांसारिक सुखों का त्याग कर देना चाहिए। सूतक काल में बच्चे, बूढ़े और रोगी रियायत के तौर पर आवश्यक मात्रा में शुद्ध भोजन पदार्थ ले सकते है। जिन लोगों की कुंडली में चंद्रमा अशुभ हो या शत्रु राशि में है उन्हे चंद्रग्रहण नही देखना चाहिए। ग्रहण काल में जप, तप, पूजा-पाठ, दान आदी करना चाहिए।