Tuesday, 23 August 2016

हल षष्ठी की व्रत कथा

हल षष्ठी की व्रत कथा

hal shsti ki vrt katha 

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भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी को यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण के ज्येष्ठ भ्राता श्री बलरामजी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इसी दिन श्री हुआ था। हल षष्ठी की व्रतकथा निम्नानुसार है.... प्राचीन काल में एक ग्वालिन थी। उसका प्रसवकाल अत्यंत निकट था। एक ओर वह प्रसव से व्याकुल थी तो दूसरी ओर उसका मन गौ-रस (दूध-दही) बेचने में लगा हुआ था। उसने सोचा कि यदि प्रसव हो गया तो गौ-रस यूं ही पड़ा रह जाएगा। 

यह सोचकर उसने दूध-दही के घड़े सिर पर रखे और बेचने के लिए चल दी किन्तु कुछ दूर पहुंचने पर उसे असहनीय प्रसव पीड़ा हुई। वह एक झरबेरी की ओट में चली गई और वहां एक बच्चे को जन्म दिया।
वह बच्चे को वहीं छोड़कर पास के गांवों में दूध-दही बेचने चली गई। संयोग से उस दिन हल षष्ठी थी। गाय-भैंस के मिश्रित दूध को केवल भैंस का दूध बताकर उसने सीधे-सादे गांव वालों में बेच दिया।

उधर जिस झरबेरी के नीचे उसने बच्चे को छोड़ा था, उसके समीप ही खेत में एक किसान हल जोत रहा था। अचानक उसके बैल भड़क उठे और हल का फल शरीर में घुसने से वह बालक मर गया।

इस घटना से किसान बहुत दुखी हुआ, फिर भी उसने हिम्मत और धैर्य से काम लिया। उसने झरबेरी के कांटों से ही बच्चे के चिरे हुए पेट में टांके लगाए और उसे वहीं छोड़कर चला गया।कुछ देर बाद ग्वालिन दूध बेचकर वहां आ पहुंची। बच्चे की ऐसी दशा देखकर उसे समझते देर नहीं लगी कि यह सब उसके पाप की सजा है। 

वह सोचने लगी कि यदि मैंने झूठ बोलकर गाय का दूध न बेचा होता और गांव की स्त्रियों का धर्म भ्रष्ट न किया होता तो मेरे बच्चे की यह दशा न होती। अतः मुझे लौटकर सब बातें गांव वालों को बताकर प्रायश्चित करना चाहिए।

ऐसा निश्चय कर वह उस गांव में पहुंची, जहां उसने दूध-दही बेचा था। वह गली-गली घूमकर अपनी करतूत और उसके फलस्वरूप मिले दंड का बखान करने लगी। तब स्त्रियों ने स्वधर्म रक्षार्थ और उस पर रहम खाकर उसे क्षमा कर दिया और आशीर्वाद दिया।

बहुत-सी स्त्रियों द्वारा आशीर्वाद लेकर जब वह पुनः झरबेरी के नीचे पहुंची तो यह देखकर आश्चर्यचकित रह गई कि वहां उसका पुत्र जीवित अवस्था में पड़ा है। तभी उसने स्वार्थ के लिए झूठ बोलने को ब्रह्म हत्या के समान समझा और कभी झूठ न बोलने का प्रण कर लिया

Monday, 15 August 2016

नौकरी प्राप्त करने के लिए चमत्कारी उपाय


 नौकरी प्राप्त करने के लिए चमत्कारी  उपाय naokari prapt krne ke liy chamatkari upay


Image result for नौकरीहर व्यक्ति  चाहता है उसकी अच्छी नौकरी हो या उसका जो कारोबार है वह बढ़ता रहे।  बर्तमान में  अच्छी  पढ़ने के बाद भी नौकरी नहीं लग पाती है। कुछ न कुछ अड़चन ऐसी आती हैं जिनकी वजह से नौकरी नहीं मिल पाती है।ज्योतिष  के अनुसार नौकरी मिलने में भी ग्रह नक्षत्रों का योग होता है। जिसकी वजह से जीवनमें  काम बनते-बिगड़ते रहते हैं। यदि इस तरह की परेशानी आ रही हो तो आप कुछ ज्योतिष के  उपायों को विश्वास के साथ करें जिससे आपको अच्छी नौकरी तो मिलेगी ही साथ ही आपकी हर तरह की विघ्न बाधा ये  भी दूर होने लगेंगी।
*.* रोजगार पाने के लिए
*विश्व भरण पोषण करि जोई |*
*ताकर नाम भरत अस होई ||*
इस चौपाई का सवा लाख जाप करे राम दरवार गौरीगानेश का पूजन कर अभिमंत्रित हनुमान यंत्र रख कर संकल्प सहित करे 
* सूर्य स्त्रोत का पाठ दिन में तीन बार करे मनो कमाना सहित |

* नौकरी प्राप्त करने के लिए गंगाजल को एक पीतल के लोटे में डाल दें और फिर इसमें चांदी की किसी भी तरह की धातु को डाल दें। फिर इस लोटे को अपने सिर के उपर से सात बार घुमाएं और इसे ईशान कोण में रख दें। और ओम् गंगाधराय नमः मंत्र का जाप 21 बारी करें।
चन्दन की माला से 11 बार ओम् वक्रतंण्डाय हूं मंत्र का जाप करें। इससे उपाय से भी सरकारी नौकरी मिलने के संकेत प्राप्त होते हैं।

*हर सोमवार के दिन शिवजी के मंदिर में जाकर शिवलिंग पर एक थैली कच्चा दूध और साबुत चावल चढ़ाएं और मन में उनसे अपने दिल की बात करें। एैसा करने से नौकरी मिलने में आ रही हर तरह की बाधा टल जाती है।
*रोज सुबह पक्षियों को दाना देने से रोजगार और नौकरी की संभावना बढ़ जाती है। पक्षियों को आप बाजरा या सात प्रकार के अनाजों का मिश्रण भी दे सकते हैं। एैसा करने से मनचाही नौकरी मिलने की संभावना बढ़ जाती है।

*नौकरी के लिए इंटरव्यू देने से पहले सुबह स्नान करते समय बाल्टी या टब में हल्दी मिलाकर स्नान करें। और प्रभु के सामने 11 अगरबत्ती जलाकर अपनी सफल होने की कामना करें। गुरु बार से 41दिन करे |

*नौकरी के लिए इंटरव्यू देने के लिए घर से निकलते वक्त एक चम्मच दही में एक चम्मच चीनी मिलाकर घर से बाहर निकलें। और ध्यान रखें कि घर से बाहर जाते समय सबसे पहले दायां पैर ही बाहर निकालें।


*किसी भी काम करने से नौकरी न मिल रही हो तो शुक्ल पक्ष में लगातार 21 दिनों तक कुंए में दूध डालें। कुंआ खाली या सूखा हुआ नहीं होना चाहिए।

नौकरी के प्राप्त करने के लिए घर से जाते समय एक नींबू पर चार लौंग चारों दिशाओं के अनुसार गाड़ दें। और ओम् श्री  हनुमते नमः का जाप 108 बार करें। और उस नींबू को भी अपने साथ ले जाएं। आपको नौकरी मिलने की संभावना बढ़ जाएगी।
सभी कार्यो में शुभ मुहूर्त का ध्यान रखे |
आप आपनी जन्म कुंडली से भी नौकरी या व्यापार के योग जान सकते है नौकरी व्यापार वर्धक यंत्र युक्त रत्न भाग्य वर्धक यंत्र धारण करे जो सफलता के योग निर्मित करेगे |

Monday, 8 August 2016

सुखी वैवाहिक जीवन जीने के 4 सरल उपाय

सुखी वैवाहिक जीवन जीने के 4 सरल उपाय--------


su khi vaivahik jivan jine ke 4 sarl upay 


Image result for  sukhi damptya jivanजो स्त्री शनिवार को चमेली के तेल का दीपक जलाकर 'श्री सुंदरकांड' का पाठ करती है, उसका दांपत्य जीवन सुखों से युक्त रहता है।

 विवाह होने से 4 दिन पहले 7 साबुत हल्दी की गांठ, पीतल के 3 सिक्के या टुकड़े, थोड़ा-सा केसर, थोड़ा-सा गुड़ व चने की दाल किसी पीले कपड़े में बांधकर कन्या अपनी ससुराल की दिशा की ओर फेंक दे। इससे कन्या ससुराल में सुखी दांपत्य जीवन में रहेगी।

हर रोज तुलसी के पौधे में जल चढ़ाएं।


'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नम:' मंत्र का जाप करे| 

Wednesday, 13 July 2016

घाघ व भड्डरी की ‘‘कृषि व मौसम संबंधी कहावतें"


घाघ व भड्डरी की ‘‘कृषि व मौसम संबंधी कहावतें"ghaghva bhddri ki krshi va mousam samvandi kahavte 

Image result for krishi mausam      चैते वर्षा आई और सावन सूखा जाई।
एक बूंद जो चैत में परे सहसबूंद सावन की हरै।
घाघ! कहते हैं यदि चैत के महीने में वर्षा होगी तो सावन के महीने में कम वर्षा होगी। यदि एक बूंद भी वर्षा की पड़ती है, तो वह सावन की हजार बूंदों को समाप्त कर देती है।
माघ के ऊमष जेठ के जाड़, पहिला वर्षा भरिगे ताल।
कहैंघाघ हम होई बियोगी, कुआ खोदि के धोईहैं धोबी।।
घाघ! कहते हैं-यदि माघ के महिने में जाड़े के बजाय गर्मी पड़े और जेठ में गर्मी के जगह जाड़ा पड़े व पहली वर्षा से तालाब भर जाये तो समझ लेना चाहिए कि इस वर्ष इतना सूखा पड़ेगा कि धोबियों को भी कपड़े धोने के लिए जल कुएं से खींचना पड़ेगा।
मंगल रथ आगे चलै, पीछे चले जो सूर।
मन्द वृष्टि तब जानिये, पडती सगले धूर।।
इस कहावत में घाघ! ज्योतिष के अनुसार ग्रह-गोचर देखकर, वर्षा की भविष्यवाणी कैसे करे बताते हैं, यदि ग्रह-गौचर में मंगल आगे और सूर्य पीछे हो निश्चित ही सूखा पड़ता है।
आगे रवि पीछे चले, मंगल जो आषाड़।
तौ बरसे अनमोल हो, पृथ्वी आनन्द बाढ़।
जिस वर्ष गौचर में सूर्य के पीछे मंगल रहते हैं उस साल वर्षा खूब होती है और पृथ्वी पर आनन्द होता है।
माघ में जो बादर लाल घिरै, सांची मानो पाथर परै।
भड्डरी! कहते हैं कि यदि माघ के महीने में लाल रंग के बादल दिखाई दे तो निश्चय ही ओले पडते हैं।
जेठ चले पुरवाई, सावन सूखा जाई।
भड्डरी! कहते हैं, यदि जेठ के महिने में पुरवा हवा चले तो सावन के महिने में सूखा पड़ेगा, ऐसा मानना चाहिए।
रात दिन घम छाहीं, घाघ कहै अब बरखा नाही।
पूनों पड़वा गाजै, दिना बहत्तर बाजै।।
कवि घाघ! कहते हैं कि रात दिन धूल छाई रहे तो वर्षा नहीं होगी, यदि जेठ के महिने में पूनो और परवा का बादल गर्जे तो समझ लो कि दो माह तक वर्षा नहीं होगी।
सवन शुक्ला सप्तमी, उगत न दीखै भान।
तब तक वर्षा होइगी, जो लगि देवउठान।।
घाघ! कहते हैं कि यदि सावन सुदी की सप्तमी को सूर्य बादल से ढका रहे तो देवउठान तक वर्षा होती है।
माघ पूस जो दखिना चले, तो सावन में लक्षन भले।
घाघ! कहते हैं कि यदि माघ तथा पूस के महिने में दक्षिण दिशा की हवा चले तो सावन में अच्छी वर्षा होती है।
दिन में गर्मी रात को ओस, कहै घाघ वर्षा सौ कोष।
घाघ! कहते है यदि दिन में गर्मी और रात को ओस पड़े तो वर्षा की कोई आशा नहीं है।
करिया बादल डरवावे, भुवरा बादल पानी लावे।
घाघ! कहते हैं काला बादल केवल वर्षा का भय दिखाता है, जबकि भूरा बादल अच्छी वर्षा करता है।
पूरब के बादल पछियां जाय, पतली छांडि के मोटी पकाव।
पछुवा बादर पूरब को जावे, मोटी छांडि के पतली खावे।।
घाघ! कहते हैं कि यदि बादल पूरब से पश्चिम की ओर जाये जो वर्षा अच्छी होती है, अन्न खूब पैदा होता है, यदि पश्चिम से पूरब की ओर हवा चले तो वर्षा कम होती है।
शुक्रवार की बादरी रही शनीचर छाय।
ऐसा बोले भड्डरी बिन बरसे ना जाय।।
भड्डरी! कहते हैं कि यदि शुक्रवार के दिन होने वाले बादल शनिवार तक छाये रहें तो वर्षा अवश्य होती है।
सावन केरे प्रथम दिन उगत न दिखे भान।
चार महिना पानी बरसें जानों इसे प्रमान।
घाघ! कहते हैं कि सावन प्रतिपदा को यदि सूरज उगता न दिखायी पड़े तो चार मास तक खूब वर्षा होती है।
माघ मास की बादरी, और क्वार का घाम।
ये दोनों जो कोई सहै, करै पराया काम।।
घाघ! कहते हैं कि वही व्यक्ति नौकरी कर सकता है जो माघ के महिने की बदली तथा क्वार के महिने का घाम सहन कर सकता हो।
भोर समें डर डम्बरा रात उजेरी होय।
दुपहरिया सूरज तपै दुरभिक्ष तेऊ जोय।।
घाघ! कहते हैं यदि प्रातःकाल बादल घिरे, दोपहर को सूरज तपे और रात में आकाश स्वच्छ रहे तो निश्चय दुर्भिक्ष जानो।
मटका में पानी गर्म चिडि़या न्हावे धूर।
चिउंटी अन्डा लै चलै तौ बरषा भरपूर।
भड्डरी! वर्षा आने का एक संकेत और बताते हैं जो देहात में खूब प्रचलित हैं, यदि घड़े का पानी गर्म रहे, चिडि़या धूल में स्नान करें और चींटी अण्डा लेकर निकले तो खूब वर्षा होती है।
उतरे जेठ जो बोले दादुर, कहैं भडडरी बरसै बादर।
भडड्री्! कहते हैं, यदि जेठ मास के समाप्त होते ही मेढ़क बोले, तो वर्षा होती है।
सब चिन्ता को छांडि कै, करि प्रभु में विश्वास।
वाकै थापै, सब थपै, बिन थापे हो नाश।।
अन्त में घाघ! कहते हैं सब चिन्ताओं को छोड़कर भगवान में विश्वास करना चाहिए। उसमें निष्ठा करने से सब कार्य सिद्ध हो जाते हैं, बिना उसके सर्वनाश होता है।

Monday, 11 July 2016

रोग निवारक सूर्याष्टकम्


rog nivarak suryastkam

 रोग निवारक सूर्याष्टकम्

।। सूर्याष्टकम् ।। 

Image result for sunआदिदेव नमस्तुभ्यं प्रसीद मम भास्कर ।
दिवाकर नमस्तुभ्यं प्रभाकर नमोस्तुते ॥१॥
सप्ताश्व रथमारूढं प्रचण्डं कश्यपात्मजम् ।
श्वेत पद्मधरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम् ॥२॥
लोहितं रथमारूढं सर्वलोकपितामहम् ।
महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम् ॥३॥
त्रैगुण्यं च महाशूरं ब्रह्मविष्णुमहेश्वरम ।
महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम् ॥४॥
बृह्मितं तेजःपुञ्जञ्च वायुमाकाशमेव च ।
प्रभुं च सर्वलोकानां तं सूर्यं प्रणमाम्यहम् ॥५॥
बन्धूकपुष्पसङ्काशं हारकुण्डलभूषितम् ।
एकचक्रधरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम् ॥६॥
तं सूर्यं जगत्कर्तारं महातेज: प्रदीपनम् ।
महापाप हरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम् ॥७॥
तं सूर्यं जगतां नाथं ज्ञानविज्ञानमोक्षदम् ।
महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम् ॥८॥
ह्रदय रोग हड्डी के रोग  नेत्र रोग में सूर्य यंत्र को अभिमंत्रित कर 

  सूर्याष्टकम् का पाठ करने से लाभ होता है सूर्य कमजोर हो तो भी सूर्याष्टकम् का पाठ करने से लाभ होता है

Friday, 8 July 2016

मंगल चण्डिका विवाह यंत्र से शीघ्र विवाह

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मंगल चण्डिका स्तोत्रम् --मंगल चण्डिका विवाह यंत्र से  शीघ्र विवाह

 Mangala Chandika Stotram

॥शंकर उवाच॥

रक्ष रक्ष जगन्मातर्देवि मंगलचण्डिके । हारिके विपदां राशेर्हर्ष-मंगल-कारिके ॥
हर्ष-मंगल-दक्षे च हर्ष-मंगल-चण्डिके । शुभे मंगल-दक्षे च शुभ-मंगल-चण्डिके ॥
मंगले मंगलार्हे च सर्व-मंगल-मंगले । सतां मंगलदे देवि सर्वेषां मंगलालये ॥
पूज्या मंगलवारे च मंगलाभीष्ट-दैवते । पूज्ये मंगल-भूपस्य मनुवंशस्य संततम् ॥
मंगलाधिष्ठातृदेवि मंगलानां च मंगले । संसार-मंगलाधारे मोक्ष-मंगल-दायिनी ॥ 
सारे च मंगलाधारे पारे च सर्वकर्मणाम् । प्रतिमंगलवारे च पूज्ये च मंगलप्रदे ॥
स्तोत्रेणानेन शम्भुश्च स्तुत्वा मंगलचण्डिकाम्
। प्रतिमंगलवारे च पूजां कृत्वा गतः शिवः ॥
देव्याश्च मंगल-स्तोत्रं यं श्रृणोति समाहितः । तन्मंगलं भवेच्छश्वन्न भवेत् तदमंगलम् ॥
प्रथमे पूजिता देवी शंभुना सर्वमंगला । द्वितीये पूजिता देवी मंगलेन ग्रहेण च ॥
तृतीये पूजिता भद्रा मंगलेन नृपेण च । चतुर्थे मंगले वारे सुन्दरीभिश्च पूजिता ॥
पञ्चमे मंगलाकाङ्क्षैर्नरैर्मंलचण्डिका ॥ 
पूजिता प्रतिविश्वेषु विश्वेशै: प्रतिमा सदा । तत: सर्वत्र संपूज्या सा बभूव सुरेश्वरी ॥
देवादिभिश्च मुनिभिर्मनुभिर्मानवैर्मुने । देव्याश्च मंगलस्तोत्रं य: शृणोति समाहित: ॥
तन्मंगलं भवेच्छश्वन्न भवेत्तदमंगलम् । वर्धन्ते तत्पुत्रपौत्रा मंगलं च दिने दिने ॥
(ब्रह-वैवर्त्त-पुराण । प्रकृतिखण्ड । ४४ । २९-४१)

 मंगल चण्डिका विवाह यंत्र को मंगल चण्डिका स्तोत्र से  पूजा करने पर होता है शीघ्र विवाह यदि आप विवाह नहीं होरहा मंगल बाधा है तो आप पूजित अभिमंत्रित  मंगल चण्डिका विवाह यंत्र हमारे कार्यालाय से प्राप्त कर सकते है 
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