Thursday, 17 August 2017

दक्षिणावर्ती शंख--के प्रयोग से बंद व्यापार भी चल निकलता है

दक्षिणावर्ती शंख--के प्रयोग से बंद व्यापार भी चल निकलता है  

Dakshinavarti Shankh ke paryog se band vyapar bhi chal nikalta hai 


Image result for दक्षिण वर्ती शंख शंख संहिता के अनुसार सभी प्रकार के शंखों की स्थापना घरों में की जा सकती है। शंख को तीन भागों में विभक्त किया गया है। जैसे वामावर्ती, दक्षिणावर्ती और मध्यावर्ती। वामावर्ती बजने वाले शंख होते हैं उनका मुंह बाईं ओर होता है तथा ये बाईं ओर से खुलते हैं। दक्षिणामुखी एक विशेष जाति का दुर्लभ अद्भुत् चमत्कारी शंख दाहिने तरफ खुलने की वजह से दक्षिणावर्ती शंख कहलाते हैं।दक्षिणावर्ती शंख मुख बंद होता है इसलिए यह शंख बजाया नहीं जाता केवल पूजा कार्य में ही इसका उपयोग होता है  दक्षिणावर्ती शंख की उत्पत्ति समुद्र के गर्भ से होती है। यह शंख अपने चमत्कारी प्रभाव के कारण दुर्लभ व मूल्यवान भी होता है। शुद्ध व असली दक्षिणावर्ती शंख को प्राप्त कर, सिद्ध, प्राण प्रतिष्ठित, जागृत कर अपने व्यवसाय स्थल, उद्योग, कार्यालय, दुकान, भवन के पूजा स्थल पर स्थापित करें। पूजा करने के बाद शंख में जल, दूध, गंगा जल, भरकर छिड़काव व शंखोदक जल से आचमन करने से दरिद्रता, कर्ज और दुर्भाग्य का नाश होता है और भाग्य प्रवाह में वृद्धि होती है। चिर स्थाई चंचल लक्ष्मी सुख समृद्धि का स्थाई वास होता है। शंख संहिता में दक्षिणावर्ती शंख कल्प के बारे में लिखा है कि जब व्यक्ति सभी तरफ से दरिद्रता के चक्कर में फंस जाता है, चारों ओर से निराशा, व्यापार में असफलता, जब आर्थिक उन्नति के उपाय विफल नजर आते हैं तब दुनिया में एक आर्थिक उन्नति का आध्यात्मिक उपाय है दक्षिणावर्ती शंख। इसकी विधिपूर्वक स्थापना कर लाभ प्राप्त किया जा सकता है। समुद्र देव द्वारा निर्मित इस तेजस्वी शंख को जो भी मनुष्य अपने घर और व्यापार स्थल के पूजा स्थान अथवा गल्ले, तिजोरी में रखकर नित्य पूजन और दर्शन करता है वहां से दरिद्रता, अभाव, असफलता और रोगों का नाश होता है। ये शास्त्रोक्त सत्य है। दक्षिणावर्ती शंख लक्ष्मी का सहोदर है। भगवती महालक्ष्मी और दक्षिणावर्ती शंख दोनों की ही उत्पत्ति समुद्र से हुई है।

दक्षिणावर्ती शंख पूजन 

>स्थापना पश्चात दक्षिणावर्ती शंख का नियमित पूजन एवं दर्शन करना चाहिए. शीघ्र फल प्राप्ति के लिए स्फटिक या कमलगट्टे की माला द्वारा
“ऊँ ह्रीं श्रीं नम: श्रीधरकरस्थाय पयोनिधिजातायं
लक्ष्मीसहोदराय फलप्रदाय फलप्रदाय
श्री दक्षिणावर्त्त शंखाय श्रीं ह्रीं नम:।”
मंत्र का जाप करना चाहिए. यह शंख  दरिद्रता से मुक्ति, यश और कीर्ति वृद्धि, संतान प्राप्ति तथा शत्रु भय से मुक्ति प्रदान करता है.

तंत्र में दक्षिणावर्ती शंख 

तांत्रिक प्रयोगों में भी दक्षिणावर्ती शंख का उपयोग किया जाता है, तंत्र शास्त्र के अनुसार दक्षिणावर्ती शंख में विधि पूर्वक जल रखने से कई प्रकार की बाधाएं शांत हो जाती है. सकारात्मक उर्जा का प्रवाह बनता है और नकारात्मक उर्जा दूर हो जाती है. इसमें शुद्ध जल भरकर, व्यक्ति, वस्तु अथवा स्थान पर छिड़कने से  तंत्र-मंत्र इत्यादि का प्रभाव समाप्त हो जाता है. भाग्य में वृद्धि होती है किसी भी प्रकार के टोने-टोटके इस शंख उपयोग द्वारा निष्फल हो जाते हैं, दक्षिणावर्ती शंख को लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है इसलिए यह जहां भी स्थापित होता है वहां धन संबंधी समस्याएं भी समाप्त होती हैं.
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Monday, 14 August 2017

हल्‍दी गणेश--जीवन के सभी कार्यो मे मनचाही सफलता के लिए रखे

हल्‍दी गणेश--जीवन के सभी कार्यो मे मनचाही सफलता के लिए रखे 

haldi-ganeshke chamatkari phayade



Image result for हल्दी  गणेशह ल्‍दी का प्रयोग सभी प्रकार के मांगलिक कार्यों में किया जाता है इसलिए इस रूप में गणेश जी की मूर्ति और भी ज्‍यादा शुभ और मंगलकारी हो जाती है। इस रूप में गणेश जी की पूजा करने से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं। भगवान गणेश तो मंगल का प्रतीक हैं। इनकी उपस्‍थिति में आपका हर कार्य सफलता से संपन्‍न होगा और भगवान गणेश के आशीर्वाद से आपके सभी कष्‍ट दूर होंगे। गणेश जी की मूर्ति का हल्‍दी के साथ होना भगवान गणेश की कृपा को दोगुना कर देता है। किसी शुभ कार्य के लिए जाते समय अपने साथ हल्‍दी गणेश अवश्‍य रखें। आपको निश्‍चित ही अपने कार्य में सफलता मिलेगी। वेदिक मंत्रो से हल्‍दी गणेश का विधिपूर्वक पूजन कर अपनी तिजोरी या मंदिर में स्‍थापित करें। नियमित रूप से रोज इसे धूप-दीप और नैवेद्य दें।आपके सभी कार्यो मे सफलता मिलेगी और विघन दूर होगे  हल्‍दी गणेश जी को विधार्थी व्यापारी वर्ग महिला वर्ग आदि सभी जन आपने पास रख कर लाभ प्राप्त कर सकते है |


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Thursday, 10 August 2017

शनि लाभ कवच को धरण करने के फायदे-जो करे हर मनोकामना पूरी

शनि लाभ कवच को धरण करने के फायदे-जो करे हर मनोकामना पूरी
shani labh kavach ke labh 



   

Image result for शनिशनि की साढ़ेसाती , ढैय्या और शनि की  महा दशा से पीड़ित जातक के जीवन में अनेक  मुश्किलें उत्पन्न होती है व्यापार शिक्षा नोकरी घरेलू जीवन मे भी  लोगों को शनि की दशा में काफी परेशानी एवं कष्ट का सामना करनापड़ता है
शनि को ग्रहों में सर्वोच्च न्यायाधीश कहा गया है जो अनुचित कार्य करने वालों को समय आने पर दंड देता है।  शनि को सूर्य पुत्र भी कहा जाता है परंतु जब कुंडली में यह दोनों ग्रह ,एक ही भाव में हों या परस्पर दृष्टि संबंध हो तो अनिष्ट फल देते हैं। यह वह ग्रह है जो राजा को रंक बना देता है और जमीन से आसमान पर भी ले जाता है।
 शनि की शांति के लिए 
शनि लाभ कवच को शुभ मुहूर्त मे लिखा जाता है षोडषउपचार पूजन एवं शनि के मंत्रो से अभिमंत्रित किए जाता है 
1 मन मे शांति उत्पन्न होती है 
2 कार्य क्षेत्र व्यापार शिक्षा नोकरी घरेलू जीवन मे आने बाले विघन बाधा दूर होती है 
3 धन हानी रुकती है 
4 जीवन  मे मिलने वाली असफलता दूर होती है 
5 नोकरी व्यापार मे धन कमाने के रास्ते खुलजाते जाते है 
6 सभी  क्षेत्र मे सफलता मिलने लगती है 
7 शनि की साढ़ेसाती , ढैय्या और शनि की  महा दशा से पीड़ित जातक के वरदान का कार्य करता है 

इस  शनि लाभ कवच को चाँदी के लाकीट मे दिया जाते है सभीजन  धरण  कर सकते  है पूर्णत सिद्ध है 
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Thursday, 3 August 2017

horoscope of Nitish Kumar कुंडली विश्लेषण-नीतीश कुमार की कुंडली का रहस्य...

भूलकर भी न करे इन 5 लोगों का अपमान होगा आपका नुकसान

भूलकर भी न करे  इन 5 लोगों का अपमान  होगा आपका  नुकसान



श्रीमद्भागवत महापुराण हिंदू धर्म ग्रंथों में एक ऐसा ग्रंथ है। जिसमें हमारे जीवन संबंधी कई समस्याओं के बारें में बताया गया है। इस ग्रंथ में खुद श्री कृष्ण ने नीति के उद्देश्य दिएं है। माना जाता है कि जो व्यक्ति इन उपदेशों का पालन करता है। उन्हे अपने जीवन में किसी भी तरीके की समस्या का सामना नहीं करना पड़ता है।इस महापुराण में ही ऐसे 5 काम के बारें में बताया गया है कि इन कामों को करना क्या इस बारें में सोचना भी महापाप माना जाता है। इससे आपका ही नुकसान होगा। जानिए ऐसे कौन सी 5 चीजे है जिनके बारें में सोचना भी महापाप है।
Image result for श्रीमद्भागवत महापुराणयदा देवेषु वेदेषु गोषु विप्रेषु साधुषु।
धर्मो मयि च विद्वेषः स वा आशु विनश्यित।।
इस श्लोक का अर्थ है कि जो व्यक्ति देवताओं, वेदों, गौ, ब्रह्माणों-साधुओं और धर्म के कामों के बारे में बुरा सोचता है। उसका जल्द ही नुकसान होता है।
देवताओं को न कहे अपशब्द
इस शास्त्र के अनुसार कभी भी खुद को भगवान से बड़ा और कभी भी भगवान को दुश्मन नहीं मानना चाहिए। क्योंकि आपको जिस बात का घमंड है वो कल आपके नाश का कारण बनेगा। जिस तरह से रावण ने देवताओं से दुश्मनी और खुद की शक्ति पर घमंड था।
वेद का अपमान
कभी भी हमें अपने वेदो का अपमान नहीं करना चाहिए। नहीं हमारे नाश का कारण बन जाते है। जैसे कि असुरों ने भगवान ब्रहमा को  परेशान कर उनके वेदो को छिनने की कोशिश की। जिसके बाद उन असुरों का नाश हुआ। इसीलिए किसी भी पुस्तक का अपमान नहीं करना चाहिए।
गौ माता का अपमान
हिंदू धर्म में गाय को माता के बराबर दर्जा दिया गया है। जो व्यक्ति सुबह उठकर गौ सेवा करता है। उसे मोझ की प्राप्ति होने के साथ-साथ सभी पापों से भी मुक्ति मिल जाती है। वहीं अगर आपने इनका अपमान किया यानि की गौ-हत्या, अपहरण आदि किया जो इसका दंड बहुत ही कठोर होता है।
गुरु-ब्राह्मणों का अपमान
गुरु-ब्राह्मण हमारे पिता के समान होते है। इने भगवान का दूसरा रुप कहा गया है। अगर आप इनका अपमान करेगे तो आपका नाश का कारण बन सकता है। ऋषियों और साधुओं के मार्गदर्शन से मनुष्य की हर कठिनाई आसान हो जाती है और वह किसी भी मुसीबत का सामना बहुत ही आसानी से कर लेता है।
धर्म कर्म को न कहे भला-बरा
कभी भी धर्म-कर्म क गलत नहीं बोलना चाहिए। इससे आने वाले समय में आपको किसी भयानक समस्या का सामना करना पड़ सकता है। जिस तरह धर्म कर्म के प्रति अश्वत्थामा की बहुत बुरी सोच थी। जिसके कारण उसे दर-दर भटकने और मुक्ति न मिलने का शाप मिला था। इसलिए कभी भी ऐसा काम न करें।