Thursday, 26 April 2018

नारियल का जन्म कैसे हुआ

नारियल का जन्म कैसे हुआ

Coconut ka jnm kaise huye 


हिन्दू धर्म में नारियल का विशेष महत्तव है।  नारियल के बिना कोई भी धार्मिक कार्यक्रम संपन्न नहीं होता है। नारियल से जुड़ी एक पौराणिक कथा भी प्रचलित है जो जिसके अनुसार नारियल का इस धरती पर अवतरण ऋषि विश्वामित्र द्वारा किया गया था। यह कहानी प्राचीन काल के एक राजा सत्यव्रत से जुड़ी है। सत्यव्रत एक प्रतापी राजा थे, जिनका ईश्वर में सम्पूर्ण विश्वास था। उनके पास सब कुछ था लेकिन उनके मन की एक इच्छा थी जिसे वे किसी भी रूप में पूरा करना चाहते थे।
Image result for nariyalवे चाहते थे की वे किसी भी प्रकार से पृथ्वीलोक से स्वर्गलोक जा सकें। स्वर्गलोक की सुंदरता उन्हें अपनी ओर आकर्षित करती थी, किंतु वहां कैसे जाना है, यह सत्यव्रत नहीं जानते थे।
एक बार ऋषि विश्वामित्र  तपस्या करने के लिए अपने घर से काफी दूर निकल गए थे और लम्बे समय से वापस नहीं आए थे। उनकी अनुपस्थिति में क्षेत्र में सूखा पड़ा गया और उनका परिवार भूखा-प्यासा भटक रहा था। तब राजा सत्यव्रत ने उनके परिवार की सहायता की और उनकी देख-रेख की जिम्मेदारी ली।
जब ऋषि विश्वामित्र वापस लौटे तो उन्हें परिवार वालों ने राजा की अच्छाई बताई। वे राजा से मिलने उनके दरबार पहुंचे और उनका धन्यवाद किया। शुक्रिया के रूप में राजा ने ऋषि विश्वामित्र द्वारा उन्हें एक वर देने के लिए निवेदन किया। ऋषि विश्वामित्र ने भी उन्हें आज्ञा दी।
तब राजा बोले की वो स्वर्गलोक जाना चाहते हैं, अपने परिवार की सहायता का उपकार मानते हुए ऋषि विश्वामित्र ने जल्द ही एक ऐसा मार्ग तैयार किया जो सीधा स्वर्गलोक को जाता था।
राजा सत्यव्रत खुश हो गए और उस मार्ग पर चलते हुए जैसे ही स्वर्गलोक के पास पहुंचे ही थे, कि स्वर्गलोक के देवता इन्द्र ने उन्हें नीचे की ओर धकेल दिया। धरती पर गिरते ही राजा ऋषि विश्वामित्र के पास पहुंचे और रोते हुए सारी घटना का वर्णन करने लगे।
देवताओं के इस प्रकार के व्यवहार से ऋषि विश्वामित्र भी क्रोधित हो गए, परन्तु अंत में स्वर्गलोक के देवताओं से वार्तालाप करके आपसी सहमति से एक हल निकाला गया। इसके मुताबिक राजा सत्यव्रत के लिए अलग से एक स्वर्गलोक का निर्माण करने का आदेश दिया गया। ये नया स्वर्गलोक पृथ्वी  एवं असली स्वर्गलोक के मध्य में स्थित होगा, ताकि ना ही राजा को कोई परेशानी हो और ना ही देवी-देवताओं को किसी कठिनाई का सामना करना पड़े। राजा सत्यव्रत भी इस सुझाव से बेहद प्रसन्न हुए, किन्तु  ना जाने ऋषि विश्वामित्र को एक चिंता ने घेरा हुआ था।
उन्हें यह बात सत्ता रही थी कि धरती और स्वर्गलोक के बीच होने के कारण कहीं हवा के ज़ोर से यह नया स्वर्गलोक डगमगा ना जाए। यदि ऐसा हुआ तो राजा फिर से धरती पर आ गिरेंगे। इसका हल निकालते हुए ऋषि विश्वामित्र ने नए स्वर्गलोक के ठीक नीचे एक खम्बे का निर्माण किया, जिसने उसे सहारा दिया।
माना जाता है की यही खम्बा समय आने पर एक पेड़ के मोटे तने के रूप में बदल गया और राजा सत्यव्रत का सिर एक फल बन गया। इसी पेड़ के तने को नारियल का पेड़ और राजा के सिर को नारियल कहा जाने लगा। इसीलिए आज के समय में भी नारियल का पेड़ काफी ऊंचाई पर लगता है।
इस कथा के अनुसार सत्यव्रत को समय आने पर एक ऐसे व्यक्ति की उपाधि दी गई ‘जो ना ही इधर का है और ना ही उधर का। यानी कि एक ऐसा इंसान जो दो धुरों के बीच में लटका हुआ है।

Wednesday, 25 April 2018

vastu tips for home, सुख समृद्धि के लिए 10 वास्तु टिप्स by muktajyotishs

सुख और समृद्धि के 9 वस्तु टिप्स

                                      सुख और समृद्धि के 9 वस्तु टिप्स   

sukh aur samrdhi ke 9 vastu tips     



हम सभी अपनी जिंदगी में सुख और समृद्धि चाहते हैं लेकिन रोजमर्रा में हम
Image result for वस्तुऐसी गलतियां करते हैं जो वास्तु के अनुसार सही नहीं होती।कुछ आसान टिप्स जो  जिंदगी में सुख और समृद्धि प्रदान करते है 
वास्तु टिप्स :

* मुख्य द्वार के सामने सीढ़ी नहीं होनी चाहिए।

* पति-पत्नी हमेशा डबल बेड पर 2 गद्दे न बिछावे   एक बिछावे   ताकि जीवन मे दरार न आवे 
* लंबे गलियारे में दर्पण जरूर लगाएं।

* सूखे फूल घर में कभी ना रखें।

* खाली दीवार की तरफ मुंह करके ना बैठें।

* दक्षिण-पश्चिम दिशा में स्फटिक का झूमर टांगें।
* रात को कपड़े बाहर न सुखाएं।

* बंद घडियां घर में अशुभ होती है।

* झाडू-पोंछा और कूड़ादान हमेशा छुपा कर रखें।

* रसोई घर में पानी और चूल्हा पास ना रखें।

Friday, 20 April 2018

बालों से जुड़े ---सगुन अपसगुन बाल सुलझाते हुए अगर कंघी गिर जाएतो

बालों से जुड़े ---सगुन अपसगुन  बाल सुलझाते हुए अगर कंघी गिर जाएतो balo se jude sagun apsagun

Image result for बालशास्त्रीय मान्यता के अनुसार बाल सुलझाते हुए अगर कंघी गिर जाए, तो यह किसी अनिष्ट की सूचना है। इसके वैज्ञानिक आधारों पर सोचें तो बार-बार ऐसा होना आपके हाथों की पकड़ कमजोर होने की पूर्व सूचना हो सकती है जो आपके शरीर की आंतरिक कमजोरी या किसी स्वास्थ्य परेशानी का संकेत भी हो सकता है।

महिलाओं के लिए उनके लंबे और खूबसूरत बाल टूटना जितनी बड़ी परेशानी उनके लिए होती है, उतनी ही अधिक परेशानी यह परिवार वालों के लिए लाने वाली मानी जाती है। लंबे बाल जब टूटते हैं तो गुच्छों का रूप ले लेते हैं। ऐसी मान्यता है कि अगर टूटे हुए बालों के गुच्छे घर में इधर-उधर बिखरे हों तो यह परिवार में कलह पैद करता है।

 बालों के बिखरे हुए गुच्छे घर को गंदा दिखाते हैं जो आपके मस्तिष्क अशांत करता है। इस प्रकार संभव है वहां रहने वालों के व्यवहार में हिंसा तथा क्रोध लाए जो कलह का कारण बन सकता है।

एक और जो अजीबोगरीब बात इनके बालों के टूटने से जुड़ी है, वो यह कि कभी भी टूटे हुए बालों को खुले में नहीं फेंकना चाहिए। महिलाएं दिल से कमजोर और भावुक होती हैं, कहते हैं कि ये अगर गलत हाथों में पड़ जाएं, तो उन बालों के माध्यम से उस महिला को वशीकृत किया जा सकता है।
एक मान्यता के अनुसार पूर्णिमा की रात में महिलाओं को खिड़की के पास खड़े होकर बाल कंघी नहीं करने चाहिए और यहां तक कि खोलकर भी वहां खड़ा नहीं होना चाहिए। खूबसूरत और लंबे बालों वाली महिलाओं को विशेषकर ऐसा करने से मना किया जाता है।
कहते हैं कि पूरी चंद्रमा की रात्रि में भूत, चुड़ैल तथा सभी प्रकार की शैतानी शक्तियां अपने चरम पर होती हैं और जो भी चीज उन्हें लुभाती है उसे वश में करना चाहते हैं। खुले हुए खूबसूरत लंबे बाल उन्हें आकर्षित करते हैं। क्योंकि कमजोर दिल होने के कारण महिलाओं पर काबू पाना उनके लिए आसान होता है...
 हर दिन सूर्यास्त के बाद भी बालों को कंघी करने या बालों को खुला रखने से महिलाओं को मना किया जाता है। खासकर लंबे बालों वाली महिलाओं को बालों की चोटी बनाकर रखने की सलाह दी जाती है।
इसी प्रकार एक और मान्यता है कि पूजा के समय महिलाओं को अपनी बाल कभी भी खुले नहीं रखने चाहिए। कहते हैं कि ऐसा करने से घर के सभी सदस्यों के लिए दुर्भाग्य लाता है।

Friday, 13 April 2018

Akshay tritya dan अक्षय तृतीया मे किये जाने वाले महादान by muktajyotishs

भगवान श्रीकृष्ण के संबंध में एक रोचक कथा

भगवान श्रीकृष्ण के संबंध में एक रोचक कथा 


Image result for श्री कृष्णश्रीमद्भगवत गीता संपूर्ण वेद और उपनिषदों का सार है। भगवान श्रीकृष्ण के संबंध में एक रोचक कथा हमें पुराणों में मिलती है जिससे हमें शिक्षा मिलत है कि हमें एकनिष्ठ बने रहना चाहिए। यदि आप बार बार अपना ईष्ट बदलते रहते हैं तो एक दिन आप खुद को हारा हुआ पाएंगे।
                                   महत्वपूर्ण कथा..एक बार की बात है। भगवान कृष्ण रुक्मणी के साथ भोजन कर रहे थे। भोजन करते करते अचानक उठकर भागने लगे। भागकर वे अचानकर ही द्वार पर ही रुककर पुन: लौटकर आए और पुन: भोजन करने लगे।

उनकी इस हरकत को देखकर रुक्मणी ने उनसे पूछा- ''भगवन! अचानक आपको यह क्या हुआ कि आप भोजन करते-करते दौड़े और फिर द्वार पर ही ठीठक कर रुके और फिर पुन: लौट आए। आखिर कहां जाना चाहते थे और अचानकर ही आपका विचार बदल गया?''

तब भगवान कृष्ण ने निराश होकर कहा- ''प्रिये! संकट में एक व्यक्ति मुझे पुकार रहा था, इसीलिए मैं उसकी मदद के लिए दौड़ा, लेकिन मैं वहां पहुंचता इससे पूर्व ही उस व्यक्ति ने अपनी आस्था बदल दी और वह किसी ओर को पुकारने लगा। तब मैं क्या करता, मैंने भी सोचा कि अब आराम से भोजन ही कर लिया जाए और उसे नियति पर छोड़ दिया जाए।

कुछ देर रुककर भगवान श्रीकृष्ण ने कहा, ''उसने मुझ पर थोड़ा भी विश्वास और धैर्य नहीं रखा। वह व्यक्ति कभी भी एकनिष्ठ नहीं रह सकता, जिनमें विश्वास और धैर्य नहीं।''

पहले तो थोड़ी सी परेशानी से ही लोग भगवान को पुकारने लग जाते हैं और जब पुकारते हैं तब यह सोचकर की पता नहीं ये भगवान कुछ करेंगे या नहीं अपने विचार बदलकर किसी और भगवान को पुकारने लग जाते हैं। ऐसे लोगों को भगवान और खुद में कभी विश्वास नहीं होता। ये आस्था बदलने वाले लोग एक दिन वेसे  ही गिर जाते हैं जैसे कि तूफान के दिनों में सूखे वृक्ष।