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Tuesday, 18 February 2014

chanakya niti


                           यदि ध्यान नहीं रखी ये बातें तो 

                किसी भी व्यक्ति का जीवन चौपट हो सकता है,








आचार्य चाणक्य कहते हैं कि...
अनालोच्य व्ययं कर्ता अनाथ: कलहप्रिय:।
आतुर: सर्वक्षत्रेषु नर: शीघ्रं विनश्यति।।
इस श्लोक में बताया गया है कि कौन-कौन सी बातें व्यक्ति को चौपट कर सकती हैं...
आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जो लोग बिना सोच-विचार किए खर्च करते हैं वे बहुत ही जल्द चौपट हो जाते हैं। अनावश्यक रूप से किसी भी प्रकार का खर्च नहीं करना चाहिए। व्यर्थ खर्च करने वाला यदि कोई राजा-महाराजा भी हो तो वह भी चौपट हो जाता है।
जिन बच्चों के माता-पिता कम उम्र में ही मृत्यु को प्राप्त हो जाते हैं, जो बच्चे अनाथ होते हैं, उनका भविष्य अंधकारमय हो जाता है। अनाथ लोग भी बहुत ही जल्द चौपट हो जाते हैं।


जो लोग बिना वजह हर किसी से झगड़ा करते हैं, उन्हें समाज में अपमान ही झेलना पड़ता है। झगड़ा करने वाले लोगों को कोई पसंद नहीं करता है। ऐसे लोगों से समाज में कोई भी किसी भी प्रकार का व्यवहार नहीं रखता है, अत:  ये लोग भी चौपट हो जाते हैं।
सबसे ज्यादा बुरी हालत उन पुरुषों की होती है जो बहुत सी स्त्रियों के लिए बेचैन रहते हैं। बहुत सी स्त्रियों के आगे-पीछे चक्कर लगाते हैं। ऐसे लोग बहुत ही जल्द चौपट हो जाते हैं। ठीक इसी प्रकार यदि कोई स्त्री किसी पर-पुरुष के साथ अनैतिक संबंध रखती है तो वह भी बर्बाद हो जाती हैआचार्य चाणक्य कहते हैं, यदि सोता हुआ सांप दिखाई दे तो उसे छेड़ना नहीं चाहिए। दूर से निकल जाना चाहिए। अन्यथा जीवन पर मौत का संकट गहरा सकता है। सांप के डंसने के बाद व्यक्ति का बचना काफी मुश्किल हो जाता है। अत: सोते हुए सांप को जगाना नहीं चाहिए।
किसी राजा को नींद से जगाने का दु:साहस नहीं करना चाहिए। ऐसा करने पर राजा का क्रोध झेलना पड़ सकता है। यदि कोई शेर या जंगली जानवर सो रहा है तो उससे भी दूर से ही निकल जाना चाहिए। अन्यथा प्राणों का संकट खड़ा हो सकता है।
यदि कोई सुअर सो रहा हो तो उसे भी नहीं जगाना चाहिए। अन्यथा वह उठते ही हर जगह गंदगी फैला देगा। इसके अलावा यदि कोई छोटा बच्चा सो रहा है तो उसे भी न उठाएं। अन्यथा उसे चुप कराना बहुत मुश्किल होगा। यदि आप किसी के घर जाएं और उनका कुत्ता सो रहा है तो उसे जगाने से भूल न करें। वह आपको काट सकता है। यदि किसी सोते हुए मूर्ख व्यक्ति को जगा दिया तो उसे समझाना लगभग असंभव ही है। अत: उसे भी नींद से जगाना नहीं चाहिए।

Sunday, 10 November 2013

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हमेशा सुखी रहना हो तो ध्यान रखें ये एक चाणक्य नीति





hamesha  sukhi  rahna ho  to  dyhanr  khe  ye ea chanakya  niti





आचार्य चाणक्य कहते हैं कि-
यो ध्रुवाणि परित्यज्य अध्रुवं परिषेवते।
ध्रुवाणि तस्य नश्यन्ति अध्रुवं नष्टमेव हि।।
इस श्लोक का अर्थ यह है कि जो व्यक्ति निश्चित वस्तुओं को छोड़कर अनिश्चित वस्तुओं की ओर भागता है उसके हाथों से दोनों ही वस्तुएं निकल जाती है। अत: जीवन में निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए इस प्रकार की गलतियां हमें नहीं करना चाहिएआचार्य चाणक्य के अनुसार लालची लोगों के साथ अक्सर ऐसा ही होता है, अंत में वह खाली हाथ रह जाता है। जो वस्तुएं और सुविधाएं हमारे पास पहले से ही हैं उन्हें छोड़कर अनिश्चित सुविधाओं के पीछे भागने वाले इंसान को अंत में दुख का ही सामना करना पड़ता है। जबकि समझदारी इसी में है कि जो वस्तुएं या सुविधाएं हमारे पास हैं उन्हीं से संतोष प्राप्त करें। इसके विपरित जो सुविधाएं हमारे पास हैं वे भी नष्ट हो जाएंगी।

Saturday, 21 September 2013

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 जिससे हम किसी भी व्यक्ति से अपना कार्य पूरा करवा सकते हैं
आचार्य चाणक्य ने ऐसा उपाय बताया है जिससे हम किसी भी व्यक्ति से अपना कार्य पूरा करवा सकते हैं।

आचार्य चाणक्य कहते हैं कि-
यस्माच्च प्रियमिच्छेत्तु तस्य ब्रूयात् सदा प्रियम्।
व्याधो मृगवधं गन्तुं गीतं गायति सुस्वरम्।।
इस श्लोक का अर्थ है कि किसी भी व्यक्ति से अपना काम करवाना हो तो हमेशा मीठा बोलना चाहिए।
आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जो लोग दूसरों से ऐसे काम करवाना चाहते हैं जिससे सिर्फ और सिर्फ उनका खुद का फायदा हो तो वे दूसरों से सदैव मीठा बोलते हैं। जिस प्रकार जंगल में शिकारी हिरण का शिकार करने के लिए मीठी आवाज में गाने गाता है। इस गाने को सुनकर हिरण शिकारी के जाल में फंस जाता है। यही बात इंसानों पर भी लागू होती है। किसी व्यक्ति को अपने जाल में फंसाने के लिए मीठी-मीठी बातों का सहारा लिया जाता है।
 इसी प्रकार किसी सांप को फंसाने के लिए सपेरा बीन बजाता है। बीन की तंरगों में फंसकर सांप सपेरे के सामने पहुंच जाता है और खुद की जान को आफत में डाल देता है। अत: इस बात का भी हमें ध्यान रखना चाहिए कि जब कोई अधिक मीठा बोले तो उसकी बातों फंसे नहीं। अन्यथा भविष्य में कोई भयंकर परिणाम झेलने पड़ सकते हैं।
इसी प्रकार किसी सांप को फंसाने के लिए सपेरा बीन बजाता है। बीन की तंरगों में फंसकर सांप सपेरे के सामने पहुंच जाता है और खुद की जान को आफत में डाल देता है। अत: इस बात का भी हमें ध्यान रखना चाहिए कि जब कोई अधिक मीठा बोले तो उसकी बातों फंसे नहीं। अन्यथा भविष्य में कोई भयंकर परिणाम झेलने पड़ सकते हैं।

Friday, 22 March 2013

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जिन लोगों के मन में पाप होता है उनसे बचकर रहना चाहिए।





आचार्य चाणक्य कहते हैं कि...
यस्माच्च प्रियमिच्छेत्तु तस्य ब्रूयात् सदा प्रियम्।
व्याधो मृगवधं गन्तुं गीतं गायति सुस्वरम्।।
इस शृलोक में आचार्य कहते हैं जिन लोगों के मन में पाप होता है उनसे बचकर रहना चाहिए। जो लोग हमारे सामने बहुत मीठा बोलते हैं, हितेषी बनते हैं लेकिन पीठ पीछे हमें नुकसान पहुंचाने या हमारा अनुचित फायदा उठाने की योजना बनाते रहते हैं उनसे बचना चाहिए।जंगल में कोई बहेलिया पक्षियों को अपने जाल में फंसाने के लिए मधुर गीत गाता है और पक्षी मीठी आवाज के कारण बहेलिए के जाल में फंस जाते हैं। इसी प्रकार हमें नुकसान पहुंचाने वाले लोग पहले बहुत मीठा-मीठा बोलते हैं, उनके मीठे व्यवहार में जो लोग फंस जाते हैं वे खुद का नुकसान कर बैठते हैं।
जिस प्रकार कोई सपेरा मधुर बीन बजाकर किसी भी सांप को अपने काबू में कर सकता है ठीक उसी प्रकार वे लोग जिनके मन में पाप होता है वे भी अपने शिकार को इसी तरह फंसते हैं।समझदार इंसान को हमेशा ध्यान रखना चाहिए कि हमें किसी की मीठी बातों में नहीं फंसना चाहिए। व्यक्ति थोड़े से लालच में फंसकर बड़ी रकम भी खतरे में डाल देता है। कोई व्यक्ति जुएं में ज्यादा पैसा कमाने के लालच में अपनी पूंजी बर्बाद कर देता है। अत: किसी भी प्रकार के लोभ के वश में कोई कार्य नहीं करना चाहिए। किसी के झूठे मायाजाल में फंसकर केवल धन ही नहीं स्वयं के जीवन को भी संकट में डालना नहीं चाहिए।