Thursday, 11 April 2013

चाणक्य नीति


चाणक्य नीति 


. चाणक्य कहते हैं कि जिस व्यक्ति का पुत्र उसके नियंत्रण में रहता है, जिसकी पत्नी आज्ञा के अनुसार आचरण करती है और जो व्यक्ति अपने कमाए धन से पूरी तरह संतुष्ट रहता है। ऐसे मनुष्य के लिए यह संसार ही स्वर्ग के समान है।

Tuesday, 9 April 2013

jyotish


jyotish




ज्योतिष   समाधान  प्रत्यके  समस्या के  सरल  शास्त्रोंकत   समाधान  के लिए सम्पर्क  करे 
1 --कुंडली निर्माण   जीवनके   सभी पहलू ----विद्या  में बाधा    सफलता न मिलाना   प्रतियोगी परीक्ष   अथक प्रयास  के बाद निराशा  हाथ लगना   आदि 
2 ---विवाहसम्बन्धित   ----मंगल   बाधा   विवाह  न होना   अनेक  समस्या उत्पन्न  होना आदि
3----संतान ---सम्बन्धित---समस्या   |
4 --नोकरी  व्यवसाय  सम्बन्धित----कि आप क्या करेगे   |
5 ---जीवन   में भाग्यशाली  वर्ष  |
6 --रोग  एवम  कष्ट  के वर्ष   |
7 -धन लाभ   एवम  धन प्रप्ति  के अनेक   चमत्कारी   प्रयोग    रत्न    धन कबच    आदि|
8-शेयरबाजार   धातु    अनाज    सोना   चांदी   आदि  में  तेजी  मंदी    ----प्रत्यके दिन कि   . विशेष  चांस    समपूर्ण  व्यापार  भविष्य आदि
सम्पर्क करे ---76 97 96 15 97 
Email------muktajyotishs@gmail.com

Monday, 8 April 2013

teji mandi

gahu jo chana me mandi 8-4-2013 sona chandi sut me mandi 9-4 sona same chandi me mandi 10-4

vivah mangal astak



विवाह मंगलाष्टक    vivah  mangal astak



ॐमत्पंकजविष्टरो हरिहरौ, वायुमर्हेन्द्रोऽनलः । चन्द्रो भास्कर वित्तपाल वरुण, प्रताधिपादिग्रहाः । प्रद्यम्नो नलकूबरौ सुरगजः, चिन्तामणिः कौस्तुभः, स्वामी शक्तिधरश्च लाङ्गलधरः, कुवर्न्तु वो मङ्गलम्॥१॥ गङ्गा गोमतिगोपतिगर्णपतिः, गोविन्दगोवधर्नौ, गीता गोमयगोरजौ गिरिसुता, गङ्गाधरो गौतमः । गायत्री गरुडो गदाधरगया, गम्भीरगोदावरी, गन्धवर्ग्रहगोपगोकुलधराः, कुवर्न्तु वो मङ्गलम्॥२॥ नेत्राणां त्रितयं महत्पशुपतेः अग्नेस्तु पादत्रयं, तत्तद्विष्णुपदत्रयं त्रिभुवने, ख्यातं च रामत्रयम् । गङ्गावाहपथत्रयं सुविमलं, वेदत्रयं ब्राह्मणम्, संध्यानां त्रितयं द्विजैरभिमतं, कुवर्न्तु वो मङ्गलम्॥३॥ बाल्मीकिः सनकः सनन्दनमुनिः, व्यासोवसिष्ठो भृगुः, जाबालिजर्मदग्निरत्रिजनकौ, गर्गोऽ गिरा गौतमः । मान्धाता भरतो नृपश्च सगरो, धन्यो दिलीपो नलः, पुण्यो धमर्सुतो ययातिनहुषौ, कुवर्न्तु वो मङ्गलम्॥४॥ गौरी श्रीकुलदेवता च सुभगा, कद्रूसुपणार्शिवाः, सावित्री च सरस्वती च सुरभिः, सत्यव्रतारुन्धती । स्वाहा जाम्बवती च रुक्मभगिनी, दुःस्वप्नविध्वंसिनी, वेला चाम्बुनिधेः समीनमकरा, कुवर्न्तु वो मङ्गलम्॥५॥ गङ्गा सिन्धु सरस्वती च यमुना, गोदावरी नमर्दा, कावेरी सरयू महेन्द्रतनया, चमर्ण्वती वेदिका । शिप्रा वेत्रवती महासुरनदी, ख्याता च या गण्डकी, पूर्णाः पुण्यजलैः समुद्रसहिताः, कुवर्न्तु वो मङ्गलम्॥६॥ लक्ष्मीः कौस्तुभपारिजातकसुरा, धन्वन्तरिश्चन्द्रमा, गावः कामदुघाः सुरेश्वरगजो, रम्भादिदेवांगनाः । अश्वः सप्तमुखः सुधा हरिधनुः, शंखो विषं चाम्बुधे, रतनानीति चतुदर्श प्रतिदिनं, कुवर्न्तु वो मङ्गलम्॥७॥ ब्रह्मा वेदपतिः शिवः पशुपतिः, सूयोर् ग्रहाणां पतिः, शुक्रो देवपतिनर्लो नरपतिः, स्कन्दश्च सेनापतिः । विष्णुयर्ज्ञपतियर्मः पितृपतिः, तारापतिश्चन्द्रमा, इत्येते पतयस्सुपणर्सहिताः, कुवर्न्तु वो मङ्गलम्॥८॥
विवाह के समय पढने  से मंगल होता है 

Saturday, 6 April 2013

महा मृत्यु जय मन्त्र

महा मृत्यु जय मन्त्र 
नित्य जाप करने से अकाल मृत्यु टलजाती है |

Tuesday, 2 April 2013

grhay aapki rashi me rahaega april 2013


grhay  aapki rashi me rahaega  april 2013




 ग्रह आपकी राशि में रहेगा    अप्रैल-13


चंद्र: माह अप्रैल के प्रारंभ चंद्र वृश्चिक राशि में है। इसके बाद दिनांक 1 अप्रैल से चंद्र रात करीब 3.15 बजे से धनु राशि में जाएगा। चंद्र लगभग ढाई दिन में राशि बदलता है। चंद्र दिनांक 3 की रात अंत करीब 5.45 बजे से मकर राशि में, 6 अप्रैल की सुबह 9 बजे से कुंभ में, 8 अप्रैल की दोपहर करीब 2 बजे से मीन में, इसके बाद 10 अप्रैल की रात करीब 9 बजे से मेष राशि में, दिनांक 13 की सुबह 6.35 बजे के बाद वृष राशि में रहेगा। इसके बाद चंद्र 15 अप्रैल की शाम 6 बजे से मिथुन राशि में, 17 अप्रैल की रात अंत करीब 5.45 बजे से कर्क राशि में, तारीख 20 अप्रैल की शाम 4 बजे से सिंह राशि में, इसके बाद 22 अप्रैल की रात करीब 12 बजे से कन्या राशि में, तारीख 24 अप्रैल की रात अंत करीब 5.15 बजे से तुला राशि में, इसके बाद 27 अप्रैल की सुबह 9 बजे से वृश्चिक में, तारीख 29 अप्रैल की दोपहर 11.30 बजे से चंद्र धनु राशि में रहेगा।शनि: शनिदेव को न्यायाधीश माना जाता है। हमारे द्वारा किए गए सभी कर्मों का फल शनि महाराज ही प्रदान करते हैं। इस माह शनि तुला राशि में स्थित है। शनि फिलहाल वक्री है।
राहु: इस माह राहु शनि के साथ तुला राशि में रहेगा।
केतु: अप्रैल-13 में केतु मेष राशि में स्थित रहेगा।गुरु: गुरु ग्रह को देवताओं का गुरु माना जाता है। इस ग्रह को बृहस्पति भी कहते हैं। यह सभी नौ ग्रहों में सबसे बड़ा ग्रह माना जाता है। अप्रैल में बृहस्पति ग्रह वृष राशि में स्थित रहेगा।
शुक्र: अप्रैल-13 के प्रारंभ में शुक्र ग्रह मीन राशि में स्थित है। दिनांक 10 अप्रैल की शाम करीब 5 बजे के बाद यह ग्रह मेष राशि में जाएगा।सूर्य: सूर्य को ग्रहों का राजा माना जाता है। इस माह के प्रारंभ में सूर्य मीन राशि में स्थित है। इसके बाद 13 अप्रैल की रात लगभग 3 बजे से सूर्य मेष राशि में प्रवेश करेगा। यह स्थिति मेष संक्रांति कहलाती है।बुध: अप्रैल-13 के प्रारंभ में बुध कुंभ राशि में स्थित है। इसके बाद 9 अप्रैल की रात करीब 3 बजे से यह मीन राशि में प्रवेश करेगा। दिनांक 28 अप्रैल की शाम 6.30 बजे के बाद बुध मेष राशि में जाएगा।मंगल: इस माह की शुरुआत में मंगल ग्रह मीन राशि में स्थित है। इसके बाद 12 अप्रैल की शाम करीब 6.10 बजे से यह मेष राशि में प्रवेश करेगा। मंगलदेव को ग्रहों के सेनापति का पद प्राप्त है।

25 aprilko hoga sal ka pahaka aor aakhri chandrgrhan



25 अप्रैल को होगा साल का पहला और आखिरी चंद्रग्रहण


25 aprilko hoga  sal  ka pahaka  aor  aakhri chandrgrhan








इस महीने की 25 तारीख को भारत में खण्डग्रास चंद्र ग्रहण होने वाला है। ये ग्रहण साल का पहला और आखिरी ग्रहण है जो भारत में दिखेगा भी और जिसका असर भी होगा। यह ग्रहण अपने आप में बहुत खास होगा जानिए क्यों?
क्योंकि भारत में दिखने वाला ये एक मात्र ग्रहण होगा जो साल का पहला और आखिरी ग्रहण होगा। ये ग्रहण बहुत खास इसलिए भी रहेगा क्योंकि हनुमान जयंती पर यह ग्रहण होगा। ग्रहण के समय सितारे बहुत खास रहेंगे। ग्रहण के समय बनने वाली ग्रह स्थिति विशेष प्रभाव देने वाली रहेगी।ग्रहण का असर कब से कब तक-

इस ग्रहण का पर्व काल बहुत कम है लेकिन यह ग्रहण दृश्य होने से महत्वपूर्ण होगा। इस खण्डग्रास चंद्र ग्रहण का सूतक 9 घण्टे पहले से ही शुरु हो जाएगा। यानी 25 अप्रैल को शाम 4 बजकर 20 मिनट से ग्रहण का सूतक शुरु हो जाएगा और 26 तारीख को 1 बजकर 54 मिनट पर ग्रहण के साथ सूतक भी खत्म हो जाएगा।
 ग्रहण में क्या करें क्या न करें-

चंद्रग्रहण शुरू होने से 9 घंटे पहले और सूर्यग्रहण शुरू होने के 12 घंटे पहले सूतक काल शुरू हो जाता है। सूतक काल में खाना खाना, सोना और सांसारिक सुखों का त्याग कर देना चाहिए। सूतक काल में बच्चे, बूढ़े और रोगी रियायत के तौर पर आवश्यक मात्रा में शुद्ध भोजन पदार्थ ले सकते है। जिन लोगों की कुंडली में चंद्रमा अशुभ हो या शत्रु राशि में है उन्हे चंद्रग्रहण नही देखना चाहिए। ग्रहण काल में जप, तप, पूजा-पाठ, दान आदी करना चाहिए।