Tuesday, 18 February 2014

chanakya niti


                           यदि ध्यान नहीं रखी ये बातें तो 

                किसी भी व्यक्ति का जीवन चौपट हो सकता है,








आचार्य चाणक्य कहते हैं कि...
अनालोच्य व्ययं कर्ता अनाथ: कलहप्रिय:।
आतुर: सर्वक्षत्रेषु नर: शीघ्रं विनश्यति।।
इस श्लोक में बताया गया है कि कौन-कौन सी बातें व्यक्ति को चौपट कर सकती हैं...
आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जो लोग बिना सोच-विचार किए खर्च करते हैं वे बहुत ही जल्द चौपट हो जाते हैं। अनावश्यक रूप से किसी भी प्रकार का खर्च नहीं करना चाहिए। व्यर्थ खर्च करने वाला यदि कोई राजा-महाराजा भी हो तो वह भी चौपट हो जाता है।
जिन बच्चों के माता-पिता कम उम्र में ही मृत्यु को प्राप्त हो जाते हैं, जो बच्चे अनाथ होते हैं, उनका भविष्य अंधकारमय हो जाता है। अनाथ लोग भी बहुत ही जल्द चौपट हो जाते हैं।


जो लोग बिना वजह हर किसी से झगड़ा करते हैं, उन्हें समाज में अपमान ही झेलना पड़ता है। झगड़ा करने वाले लोगों को कोई पसंद नहीं करता है। ऐसे लोगों से समाज में कोई भी किसी भी प्रकार का व्यवहार नहीं रखता है, अत:  ये लोग भी चौपट हो जाते हैं।
सबसे ज्यादा बुरी हालत उन पुरुषों की होती है जो बहुत सी स्त्रियों के लिए बेचैन रहते हैं। बहुत सी स्त्रियों के आगे-पीछे चक्कर लगाते हैं। ऐसे लोग बहुत ही जल्द चौपट हो जाते हैं। ठीक इसी प्रकार यदि कोई स्त्री किसी पर-पुरुष के साथ अनैतिक संबंध रखती है तो वह भी बर्बाद हो जाती हैआचार्य चाणक्य कहते हैं, यदि सोता हुआ सांप दिखाई दे तो उसे छेड़ना नहीं चाहिए। दूर से निकल जाना चाहिए। अन्यथा जीवन पर मौत का संकट गहरा सकता है। सांप के डंसने के बाद व्यक्ति का बचना काफी मुश्किल हो जाता है। अत: सोते हुए सांप को जगाना नहीं चाहिए।
किसी राजा को नींद से जगाने का दु:साहस नहीं करना चाहिए। ऐसा करने पर राजा का क्रोध झेलना पड़ सकता है। यदि कोई शेर या जंगली जानवर सो रहा है तो उससे भी दूर से ही निकल जाना चाहिए। अन्यथा प्राणों का संकट खड़ा हो सकता है।
यदि कोई सुअर सो रहा हो तो उसे भी नहीं जगाना चाहिए। अन्यथा वह उठते ही हर जगह गंदगी फैला देगा। इसके अलावा यदि कोई छोटा बच्चा सो रहा है तो उसे भी न उठाएं। अन्यथा उसे चुप कराना बहुत मुश्किल होगा। यदि आप किसी के घर जाएं और उनका कुत्ता सो रहा है तो उसे जगाने से भूल न करें। वह आपको काट सकता है। यदि किसी सोते हुए मूर्ख व्यक्ति को जगा दिया तो उसे समझाना लगभग असंभव ही है। अत: उसे भी नींद से जगाना नहीं चाहिए।

Thursday, 13 February 2014

vastu shastr aur ghar ki window


वास्तु शास्त्र औरघर की खिड़कियां

vastu shastr aur ghar ki       window


जब आप अपने घर की खिड़कियों को वास्तु शास्त्र के नियमो  से बनवाएंगे। तो  घर की खिड़कियां, घर के भीतर कई तरह की ऊर्जा को अंदर लाती हैं। ऐसे में जरूरत यह है कि घर में हमेशा सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश हो वास्तु शास्त्र के अनुसार कुछ नियमो ध्यान में रखे तो जीवन को भी खुशहाल बना सकते हैं------- खिड़कियां 
   खिड़कियां अंदर की ओर खुलनी चाहिए।
. घर में खिड़कियां का मुख्य लक्ष्य, भवन में शुद्ध वायु के निरंतर प्रवाह के लिए होता है।
 खिड़कियां द्वार के समक्ष होनी चाहिए ताकि चुम्बकीय चक्र पूर्ण हो सके, इससे घर में सुख-शांति रहती है।
. खिड़कियों का निर्माण संधि भाग में नहीं होना चाहिए।
.पश्चिमी, पूर्वी और उत्तरी दीवारों पर खिड़कियों का निर्माण शुभ होता है।
. उत्तर दिशा में अधिक खिड़कियां परिवार में धन-धान्य की वृद्धि करती हैं। लक्ष्मी कुबेर की कृपादृष्टि बनी रहती 

है|
भवन के दक्षिण  दिशा में खिड़कियां नही रहना चाहिए|  

Wednesday, 12 February 2014

चाणक्य नीति




स्त्री करती है ये काम तो होती है बदनाम, पुरुष करे तो होता है नाम




चाणक्य  नीति



स्त्री करती है ये काम तो होती है बदनाम, पुरुष करे तो होता है नाम



आचार्य चाणक्य कहते हैं कि-
भ्रमन्सम्पूज्यते राजा भ्रमन्सम्पूज्यते द्विज:।
भ्रमन्संपूज्यते योगी स्त्री भ्रमन्ती विनाश्यति।।
इस श्लोक में आचार्य कहते हैं कि यदि कोई राजा अपने राज्य में भ्रमण करता है तो उसे मान-सम्मान प्राप्त होता है। राजा भ्रमण करके ही प्रजा के दुख और दर्द को जान सकता है। प्रजा के दुख जानने के बाद जो राजा उनका निवारण करता है, वह पूजनीय हो जाता है।
यदि कोई स्त्री हमेशा भ्रमण करती रहती है तो उसे समाज में सम्मान की प्राप्ति नहीं होती है। चाणक्य ने लगातार भ्रमण करने वाली स्त्री के विषय में बताया है कि ऐसी स्त्रियां धर्म से विचलित हो जाती हैं।
जो ब्राह्मण, ज्ञानी या योगी पुरुष इधर-उधर भ्रमण करते हुए शास्त्रों का ज्ञान बांटता है, उसे समाज में मान-सम्मान मिलता है। एक स्थान पर रुका हुआ ब्राह्मण या ज्ञानी प्रसिद्धि प्राप्त नहीं कर सकता है। किसी भी ज्ञानी के लिए जरूरी है कि वह अपना ज्ञान लोगों में बांटे, तभी उसका जीवन सार्थक हो सकता है। यदि कोई स्त्री ज्ञानी हो तो वह भ्रमण करके अपने ज्ञान का प्रसार कर सकती है। इसमें कोई दोष नहीं है।
स्त्रियों के संबंध में आचार्य ने बताया है कि लगातार इधर-उधर व्यर्थ ही, किसी अच्छे उद्देश्य के बिना घुमने वाली स्त्री के कारण उसके परिवार को भी समाज में नीचा देखना पड़ता है। समाज ऐसी स्त्रियों को सम्मान नहीं देता है। अत: महिलाओं को इस संबंध में विशेष ध्यान रखना चाहिए।
गुणैरुत्तमतां यान्ति नोच्चैरासनसंस्थिता:।
प्रसादशिखरस्थोऽपि किं काक: गरुडायते।।
आचार्य चाणक्य कहते हैं कि व्यक्ति अपने गुणों से ही महान बन सकता है। जिस व्यक्ति में कोई गुण नहीं है, वह कभी महान नहीं हो सकता है। सिर्फ किसी ऊंचे स्थान पर बैठ जाने से व्यक्ति पूजनीय और सम्मानीय नहीं सकता है।
यदि कोई कौआ किसी ऊंचे भवन पर बैठ जाए तो वह गरुड़ नहीं बन सकता है। ठीक इसी प्रकार मूर्ख और गुणहीन व्यक्ति महान नहीं हो सकता है।





अतिक्लेशेन ये अर्था धर्मस्याऽतिक्रमेण तु।
शत्रूणां प्रणिपातेन ते ह्यर्था न भवन्तु मे।।
इस श्लोक में आचार्य चाणक्य ने धन के संबंध में महत्वपूर्ण नीति बताई है। वे कहते हैं कि यदि किसी धन को प्राप्त करने में असहनीय तकलीफ उठानी पड़े, धर्म का मार्ग छोड़नी पड़े, शत्रुओं के सामने नीचा देखना पड़े तो ऐसा धन व्यर्थ है। इस प्रकार के धन का मोह नहीं करना चाहिए।
दूसरों से गाली सुनकर भी स्वयं उन्हें गाली न दें। क्षमा करने वालों का रोका हुआ क्रोध ही गाली देने वाले को जला डालता है और उसके पुण्य को भी ले लेता है।
रूखी वाणी और कठोर स्वभाव वाला जो व्यक्ति दूसरों के मर्म पर चोट करता है और कष्ट देता है, ऐसे मनुष्य को समझना चाहिए कि वह मृत्यु समान जीवन को ढो रहा है
जैसे कपड़ों को जिस रंग में रंगा जाए वे उसी रंग के हो जाते हैं, वैसे ही सज्जन पुरुष भी चोर या तपस्वी में से जिनकी सेवा करते हैं, उन पर उन्हीं का रंग चढ़ जाता है।
मनुष्य जिन विषयों से मन को हटाता जाता है, उन विषयों से उसकी मुक्ति होती जाती है। इस तरह यदि वह इन सब विषयों की ओर से निवृत हो जाए
तो उसे कभी दुख नहीं होगा

जो स्वयं न किसी से जीता जाता है और न किसी को जीतने की इच्छा करता है, न किसी के साथ बैर करता है और न कष्ट देता है, वह हर्ष व शोक से परे हो जाता है।
जो अपनी उन्नति चाहता है, वह उत्तम पुरुषों की सेवा करे। समय आने पर मध्यम पुरुषों की भी सेवा करे, लेकिन कभी भी अधम पुरुषों की सेवा न करे।








































Tuesday, 11 February 2014

वैलेंटाइन्स डे.

                           happy,happy,happy                                                                  

                                  वैलेंटाइन्स डे.






फरवरी क्यों होती हैखास   क्योकि  प्रत्यके डे होता  है खास  जाने ...
.
7 फरवरी - रोज डे, निकल गया....
 
8 फरवरी - प्रोपोज डे, अब तो अगले साल ही आएगा
 
9 फरवरी - चॉकलेट डे, मना लिया होगा
 
10 फरवरी - टेडी डे, ये भी सेलिब्रेट कर लिया होगा
 
11 फरवरी - प्रॉमिस डे...आज ही है  खूब प्रॉमिस करें वादे होते ही हैं तोड़ने के लिए......
 
12 फरवरी - आलिंगन दिवस...HUG DAY... चेतावनी- जरा सोच समझकर भैया
 
हमारी कोई जिम्मेदारी नहीं होगी........अपने रिस्क पर
 
13 फरवरी - KISS DAY किस डे.. इमरान हाशमी का ध्यान करके फिर हिम्मत करें
 
ये भी रिस्की हो सकता है....
 
14 फरवरी - वैलेंटाइन्स डे...खास पावन पर्व...
.
.15 फरवरी- पॉकेट खाली डे.....
************************************************

अर्ज़ किया है:
मत निकालो मेरा जनाज़ा उसकी गली से यारों;
वर्ना
उसकी माँ कहेगी कि
.
. .
. . .
"कमीना मरते-मरते भी एक राउंड लगा गया"।
शुभ वैलेंटाइन्स डे
******************************************
जब संजय दत्त को 30 दिन की पैरोल मिलने की ख़बर पढ़ी तो माँ बोली: "यह देखो आज कल जेल में भी छुट्टी मिलती है, तुम ऐसी कौन सी कंपनी में काम करते हो जिसमे छुट्टी मिलती ही नहीं।"

******************************************88
टीचर: किसी ऐसी जगह का नाम बताओ जहाँ बहुत सारे लोग हों, फिर भी आप अकेला महसूस करते हो?
पप्पू: परीक्षा भवन!




























Monday, 10 February 2014

हस्त रेखा में ऊँगलीयो से फलादेश



 हस्त रेखा   में ऊँगलीयो  से फलादेश





 तर्जनी उंगली ----
हमारी हथेली में अंगूठे से पहली उंगली यानी इंडेक्स फिंगर को ही तर्जनी उंगली कहा जाता है। इस उंगली के नीचे गुरु पर्वत स्थित होता है, इसी वजह से इसे गुरु की उंगली भी कहते हैं। सामान्यत: इस उंगली के आधार पर व्यक्ति की नेतृत्व क्षमता यानी व्यक्ति किसी टीम का नेतृत्व कर सकता है या नहीं और व्यक्ति की महत्वकांक्षा पर विचार किया जाता है।

 यदि किसी व्यक्ति के हाथों में इंडेक्स फिंगर (तर्जनी उंगली) मीडिल फिंगर (मध्यमा उंगली) के बराबर हो यानी सामान्य से थोड़ी लंबी हो तो वह व्यक्ति अन्य लोगों पर राज या हुकुमत करने वाला होता है। 
- यदि ऐसी उंगली वाले हाथ के अन्य लक्षण भी अच्छे हो तो वह व्यक्ति हजारों लोगों पर राज करने वाला होता है। ये लोग थोड़े घमंडी स्वभाव के होते हैं।

यदि हथेली में इंडेक्स फिंगर मीडिल फिंगर से अधिक लंबी हो तो व्यक्ति अत्यधिक घमंड करने वाला होता है। ऐसे लोग खुद को अधिक श्रेष्ठ समझते हैं और इनका स्वभाव तानाशाही करने वाला होता है।
- यदि किसी व्यक्ति के हाथों में तर्जनी उंगली की लंबाई सामान्य लंबाई से छोटी है तो इंसान महत्वकांक्षी नहीं होता  है|
यदि इंडेक्स फिंगर (तर्जनी उंगली) रिंग फिंगर (अनामिका उंगली) से बड़ी हो तो व्यक्ति अति महत्वकांक्षी होता है। ऐसे लोग कभी-कभी अति उत्साह में कार्य बिगाड़ भी लेते हैं, जिससे इन्हें धन हानि का भी सामना करना पड़ता है।
- यदि किसी व्यक्ति की हथेली में रिंग फिंगर और इंडेक्स फिंगर दोनों एक समान हैं तो व्यक्ति अधिक पैसा और मान-सम्मान प्राप्त करने की इच्छा रखता है। यदि इंडेक्स फिंगर रिंग फिंगर से थोड़ी छोटी हो तो व्यक्ति हर परिस्थिति में संतुष्ट रहने वाला होता है।

मध्यमा उंगली -----यह उगली सबसे बड़ी होती है |सभी उगली में 3 पर्व होते है \यदि मध्यमा का पहला पोर लम्बा व चौड़ा हो तो वे व्यक्ति  दानी चतुर गंभीर स्वभाव होते है |दूसरापोर लम्बा व चौड़ा हो तो वे व्यक्ति पैसा की पूजा करने वाला होता है |विद्या  में ध्यान कम होता है |

अनामिकाउगली ----अनामिका- मध्यमा के सामान हो तो व्यक्ति हर जोखिम उठा करपैसा कमाने  का प्रयत्न करता है सट्टा आदि में भी रूचि रखता है नोकरी भी देती हैअनामिका का  पहला   पोर लम्बा व चौड़ा हो कला में रूचि चतुर वक्ता होता है |

कनिष्ठका ऊँगली ---- पहला पोर लम्बा व चौड़ा हो तो वे व्यक्तिकिसी न किसी हुनर में होशियारहो आपने विचारो को दूसरो के सामने प्रकट करने में सक्षम हो ता है -कनिष्ठका ऊँगली  दूसरा     पोर लम्बा व चौड़ा हो तो वे व्यक्ति  डाक्टर ,वकील इंजीनियरिंग में रूचि रखता है |


                                                                                                                                                                                                                                            यदि आप अपनी  हस्त रेखा से फल जानना चाहते है तो इस न.पर सम्पर्क कर सकते है |
मो.+91 76 97 96 15 97 






Thursday, 30 January 2014

chanakya niti


जब किसी स्त्री या पुरुष को परखना हो तो ध्यान रखें ये चाणक्य नीति


जब किसी स्त्री या पुरुष को परखना हो तो ध्यान रखें ये चाणक्य नीति



आचार्य चाणक्य कहते हैं-
आतुरे व्यसने प्राप्ते दुर्भिक्षेत्र शत्रुसंकटे।
राजद्वारे श्मशाने च यस्तिष्ठति स बांधव:।
आचार्य चाणक्य ने इस श्लोक में 6 बातें ऐसी बताई हैं, जिनसे हम अपने और पराए लोगों की पहचान कर सकते हैं।
चाणक्य के अनुसार जो व्यक्ति आपकी बीमारी में, दुख में, दुर्भिक्ष में, शत्रु द्वारा कोई संकट खड़ा करने पर, शासकीय कार्यों में, शमशान में ठीक समय पर आ जाए वही इंसान आपका सच्चा हितैषी हो सकता है।सामान्यत: ऐसा देखा जाता है कि व्यक्ति ज्यादा अच्छी वस्तु प्राप्त करने के लिए जो उसके पास है उसे छोड़कर दूसरी की ओर भागता है। इस परिस्थिति में दोनों ही वस्तुएं उसके हाथों से निकल जाती है। ऐसी परिस्थितियों के संबंध में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि-
यो ध्रुवाणि परित्यज्य अध्रुवं परिषेवते।
ध्रुवाणि तस्य नश्यन्ति अध्रुवं नष्टमेव हि।।
इस श्लोक का अर्थ है कि जो व्यक्ति निश्चित वस्तुओं को छोड़कर अनिश्चित वस्तुओं की ओर भागता है उसके हाथों से दोनों ही वस्तुएं निकल जाती है। अत: जीवन में निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए इस प्रकार की गलतियां हमें नहीं करना चाहिए।
 कुछ लोग गुण के धनी होते हैं। कुछ लोग धन के धनी होते हैं। जो धन के धनी होते हुए भी गुणों के कंगाल हैं, ऐसे व्यक्तियों का साथ तुरंत छोड़ देना चाहिए।
- इस जीवन का कोई ठिकाना नहीं है। जिस काम को करने के बाद खाट में बैठकर पछताना पड़े ऐसे काम को पहले से ही नहीं करना चाहिए।
- समुद्र में गिरी हुई वस्तु नष्ट हो जाती है। जो सुनता नहीं है उससे कही हुई बात नष्ट हो जाती है। अजितेंद्रिय पुरुष बिना वजह कलह करना मूर्खों का काम है। बुद्धिमान लोगों को इससे बचना चाहिए। ऐसा करके वे लोक में यश पाते हैं और अनर्थ से बच जाते हैं।
- मित्र तो ऐसा होना चाहिए जो कृतज्ञ, धार्मिक, सच बोलने वाला, उदार, अनुराग रखने वाला, दृढ़, जितेंद्रिय और मर्यादा के अंदर रहने वाला हो।
- जो अधर्म से कमाए हुए धन से परलोक साधन यज्ञादि कर्म करता है, वह मरने के बाद उसके फल को नहीं पाता है। क्योंकि उसका धन अधर्म से कमाया होता है।
 आग में जल रहे मृत पुरुष के पीछे तो सिर्फ उसका भला या बुरा कर्म ही जाता है। इसलिए पुरुषों को चाहिए कि वे धीरे-धीरे प्रयत्नपूर्वक धर्म का संग्रह करें।
- जो व्यक्ति अधर्म से मिली बड़ी से बड़ी धन राशि को भी छोड़ देता है। वह जैसे सांप अपनी केंचुली को छोड़ता है उसी तरह दुख से मुक्त हो सुखपूर्वक सोता है।
- दो काम करने वाला मनुष्य इस लोक में प्रसिद्ध हो जाता है। पहला किसी भी व्यक्ति से कठोर वचन न कहना। दूसरा, दुष्टजनों से दूर रहना।




Gupt Navratri 31-1-2014 se 8-2-2014

Gupt Navratri  31-1-2014 se  8-2-2014

                
  माघ मास की 

             गुप्त नवरात्रि कल से






हिंदू धर्म के अनुसार एक वर्ष में चार नवरात्रि होती है लेकिन आमजन केवल दो नवरात्रि (चैत्र व शारदीय नवरात्रि) के बारे में ही जानते हैं। आषाढ़ तथा माघ मास की नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहा जाता है। इस बार माघ मास की गुप्त नवरात्रि का प्रारंभ माघ शुक्ल प्रतिपदा यानी कल से (31 जनवरी, शुक्रवार) हो रहा है, इस नवरात्रि का समापन 8 फरवरी, शनिवार को होगा। 
इस नवरात्रि में भी मां दुर्गा के विभिन्न रुपों का पूजन किया जाता है। धर्म ग्रंथों के अनुसार इस नवरात्रि में हर तिथि पर माता के एक विशेष रूप का पूजन करने से भक्त की हर मनोकामना पूरी होती है।
गुप्त नवरात्रि के पहले दिन (31 जनवरी, शुक्रवार) मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। मार्कण्डेय पुराण के अनुसार देवी का यह नाम हिमालय के यहां जन्म होने से पड़ा। हिमालय हमारी शक्ति, दृढ़ता, आधार व स्थिरता का प्रतीक है। मां शैलपुत्री को अखंड सौभाग्य का प्रतीक भी माना जाता है। नवरात्रि के प्रथम दिन योगीजन अपनी शक्ति मूलाधार में स्थित करते हैं व योग साधना करते हैं
गुप्त नवरात्रि के दूसरे दिन (1 फरवरी, शनिवार) मां ब्रह्मचारिणी की पूजा होती है। देवी ब्रह्मचारिणी ब्रह्म शक्ति यानि तप की शक्ति का प्रतीक हैं। इनकी आराधना से भक्त की तप करने की शक्ति बढ़ती है। साथ ही सभी मनोवांछित कार्य पूर्ण होते हैं।
गुप्त नवरात्रि का तीसरा दिन (2 फरवरी, रविवार) माता चंद्रघंटा को समर्पित है। यह शक्ति माता का शिवदूती स्वरूप है। इनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र है, इसी कारण इन्हें चंद्रघंटा देवी कहा जाता है। असुरों के साथ युद्ध में देवी चंद्रघंटा ने घंटे की टंकार से असुरों का नाश कर दिया था। नवरात्रि के तृतीय दिन इनका पूजन किया जाता है।
माघ मास की गुप्त नवरात्रि के चौथे दिन (3 फरवरी, सोमवार) की प्रमुख देवी मां कुष्मांडा हैं। देवी कुष्मांडा रोगों को तुरंत की नष्ट करने वाली हैं। इनकी भक्ति करने वाले श्रद्धालु को धन-धान्य और संपदा के साथ-साथ अच्छा स्वास्थ्य भी प्राप्त होता है।
गुप्त नवरात्रि के पांचवें दिन (4 फरवरी, मंगलवार) स्कंदमाता की पूजा की जाती है। स्कंदमाता भक्तों को सुख-शांति प्रदान करने वाली हैं। देवासुर संग्राम के सेनापति भगवान स्कन्द की माता होने के कारण मां दुर्गा के पांचवे स्वरूप को स्कन्दमाता के नाम से जानते हैं। पांचवे दिन इस शक्ति की उपासना होती है
गुप्त नवरात्रि के छठे दिन (5 फरवरी, बुधवार) आदिशक्ति श्री दुर्गा का छठे रूप कात्यायनी की पूजा-अर्चना का विधान है। महर्षि कात्यायन की तपस्या से प्रसन्न होकर आदिशक्ति ने उनके यहां पुत्री के रूप में जन्म लिया था। इसलिए वे कात्यायनी कहलाती हैं। 
नवरात्रि के छठे दिन इनकी पूजा और आराधना होती है।
महाशक्ति मां दुर्गा का सातवां स्वरूप हैं कालरात्रि। मां कालरात्रि काल का नाश करने वाली हैं, इसी वजह से इन्हें कालरात्रि कहा जाता है। गुप्त नवरात्रि के सातवें दिन (6 फरवरी, गुरुवार) मां कालरात्रि की पूजा की जाती है। 
मां कालरात्रि की आराधना के समय भक्त को अपने मन को भानु चक्र जो ललाट अर्थात सिर के मध्य स्थित करना चाहिए।
माघ मास की गुप्त नवरात्रि के आठवें दिन (7 फरवरी, शुक्रवार) मां महागौरी की पूजा की जाती है। आदिशक्ति श्री दुर्गा का अष्टम रूप श्री महागौरी हैं। मां महागौरी का रंग अत्यंत गौरा है, इसलिए इन्हें महागौरी के नाम से जाना जाता है। 
माघ मास की गुप्त नवरात्रि का समापन 8 फरवरी, शनिवार को होगा। गुप्त नवरात्रि के अंतिम दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। मां सिद्धिदात्री भक्तों को हर प्रकार की सिद्धि प्रदान करती हैं